सपा प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल मतीन सिद्दीकी ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा संशोधन अध्यादेश 2026 का विरोध करते हुए इसे वापस लेने और तत्काल रद्द करने की मांग की।
हल्द्वानी। समाजवादी पार्टी के उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल मतीन सिद्दीकी ने राज्य सरकार द्वारा लाए गए उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम (संशोधन) अध्यादेश, 2026 के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने 30 जून 2026 को जारी इस अध्यादेश को भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों का घोर उल्लंघन करार दिया है। मतीन सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि यह कदम मुस्लिम समाज को उनकी धार्मिक शिक्षा से वंचित करने का एक सोचा-समझा षड्यंत्र है।
सपा नेता ने अध्यादेश की धारा 16(c) को पूरी तरह से असंवैधानिक और दमनकारी बताया है। इस संशोधन के तहत यदि किसी संस्थान में “धार्मिक शिक्षा” दी जाती है, तो प्रशासन को ताला लगाने, 5 लाख का जुर्माना ठोकने, रिसीवर नियुक्त करने और FIR दर्ज कराने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि कानून में “धार्मिक शिक्षा” की कोई स्पष्ट परिभाषा तय नहीं की गई है, जिससे संस्थाओं पर मनमानी कार्रवाई का खतरा बढ़ गया है।
सिद्दीकी ने तर्क दिया कि संविधान का अनुच्छेद 30(1) अल्पसंख्यकों को अपनी शिक्षण संस्थाएं स्थापित करने और संचालित करने का पूर्ण अधिकार देता है। एक ही कथित उल्लंघन पर चार-चार कड़े दंड देना दोहरे दंड के सिद्धांत और अनुच्छेद 20(2) का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने चेतावनी दी कि जानबूझकर अस्पष्ट शब्दों का इस्तेमाल कर मदरसों को निशाना बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
समाजवादी पार्टी ने सरकार से मांग की है कि इस विवादित अध्यादेश को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। पार्टी ने कहा कि जब तक विधानसभा में इस पर विस्तृत चर्चा न हो, तब तक किसी भी संस्थान के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। इसके साथ ही मदरसा बोर्ड, जमीयत उलेमा-ए-हिंद और समस्त मुस्लिम संगठनों को इस विषय पर अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए।