Report by : CWN Desk
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आपको भी चाहिए शस्त्र लाइसेंस तो देना होगा दिमागी स्वस्थ्य होने का प्रमाण पत्र

हरिद्वार जिले में लागू, शस्त्र बनाने की प्रक्रिया हुई और कठिन

हरिद्वार। शस्त्र लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया को अब और कठिन कर दिया है। हथियार लेने वाले को अब मानसिक रूप से स्वस्थ्य होने का प्रमाण पत्र देना होगा, इसके बाद ही शस्त्र लाइसेंस डीएम ऑफिस से जारी होगा। अभी तक लाइसेंस के लिए नेत्र जांच समेत सामान्य मेडिकल प्रमाण पत्र लिया जाता था।
लाइसेंसी असलहों स्टेटस सिंबल से जुड़ा है। कई लोग इसका गलत इस्तेमाल करते हैं। हर्ष फायरिंग में भी कई लोगों की जान जा चुकी है। मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण भी खुद की जान ले लेते हैं या दूसरों को मार देते हैं। इसी को देखते हुए लाइसेंस आवेदन में मनोचिकित्सक की रिपोर्ट की अनिवार्यता की गई है।
जिलाधिकारी हरिद्वार धीराज सिंह गर्ब्याल ने बताया कि पूर्व में घटी कई घटनाओं के दृष्टिगत असलहे के लाइसेंस के आवेदन में एक नई शर्त जोड़ी गई है।

कौन ले सकता है हथियार का लाइसेंस?
आर्म्स एक्ट 1959 (Arms Act 1959) के मुताबिक कोई भी ऐसा शख्स जो भारत का नागरिक है और उसकी उम्र 21 साल या इससे अधिक है, वह लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकता है। आवेदनकर्ता पर न तो कोई आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए ना ही कोई आपराधिक रिकॉर्ड होना। साथ ही शारीरिक-मानसिक रूप से स्वस्थ होना भी जरूरी है।

कहां से मिलता है हथियार का लाइसेंस?
हथियार के लाइसेंस के लिए संबंधित जिला अधिकारी या कमिश्नर ऑफिस के शस्त्र लाइसेंस विभाग में आवेदन करना होता है। आवेदन के बाद इसकी कॉपी संबंधित जिले के एसएसपी या पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय को भेजी जाती है और यहां से कॉपी संबंधित थाने को जाती है। साथ जिला अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो भी भेजा जाता है। ताकि पता किया जा सके कि संबंधित आवेदक पर कोई एफआईआर या आपराधिक इतिहास तो नहीं रहा है।
आवेदन में क्या जानकारी देनी होती है?
आवेदन में इस बात को साफ-साफ बताना होता है कि आप को हथियार के लाइसेंस की आवश्यकता क्यों है? किससे जान का खतरा है और क्यों। आवेदन फॉर्म में यह भी बताना होता है कि किस तरीके के हथियार का लाइसेंस चाहते हैं। साथ ही एड्रेस प्रूफ, पहचान पत्र, आयु प्रमाण पत्र, चरित्र प्रमाण पत्र, इन्कम सर्टिफिकेट, मेडिकल सर्टिफिकेट जैसे दस्तावेज भी जमा करने होते हैं।
पुलिस रिपोर्ट के आधार पर ही मिलता है लाइसेंस
पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर ही डीएम या संबंधित अधिकारी लाइसेंस जारी करता है। मंजूरी के बाद लाइसेंस की फीस जमा करनी होती है, जो अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग है। लाइसेंस जारी होने के बाद हथियार खरीद सकते हैं। इसके बाद दोबारा जिला प्रशासन लाइसेंस और हथियार का मिलान करता है और अपने रिकॉर्ड में दर्ज करता है। प्रत्येक 3 वर्ष के दौरान लाइसेंस रिन्यू भी कराना होता है।
गोलियों का हिसाब भी रखना होता है
लाइसेंस के साथ गोलियों का भी पूरा हिसाब रखना होता है। प्रशासन एक कोटा निर्धारित करता है और उतनी ही गोली रख सकते हैं। गोली खरीदते वक्त आपको पूरा हिसाब देना पड़ता है कि कहां खर्च किया।
कब कैंसिल हो सकता है हथियार का लाइसेंस
जिला प्रशासन या सक्षम अधिकारी के पास लाइसेंस रद्द करने का अधिकार भी है। आर्म्स एक्ट के मुताबिक किसी को डराने-धमकाने, शिकार अथवा मनोरंजन, हर्ष फायरिंग, रुतबा दिखाने और बेजा इस्तेमाल जैसी स्थिति में लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। इसके अलावा चुनाव अथवा सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने के डर से प्रशासन हथियार जमा भी करवा सकता है।

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