उत्तराखंड सरकार की बनबसा कैबिनेट बैठक में नजूल भूमि के नियमितीकरण और ₹200 करोड़ की स्किल डेवलपमेंट योजना समेत कई बड़े फैसलों को मंजूरी मिली।
चंपावत। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में भारत-नेपाल सीमा से सटे बनबसा में एक ऐतिहासिक कैबिनेट बैठक आयोजित की गई। चंपावत जिले में पहली बार हुई इस राज्य कैबिनेट बैठक में प्रदेश के विकास से जुड़े करीब 24 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सहमति बनी। इस बैठक के जरिए सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि विकास योजनाओं का ध्यान अब केवल राजधानी तक सीमित न रहकर राज्य के सीमांत और पर्वतीय क्षेत्रों तक पहुंचेगा।
इस कैबिनेट बैठक का सबसे प्रमुख फैसला प्रदेश में मौजूद नजूल भूमि के नियमितीकरण को लेकर रहा। सरकार ने घोषणा की कि खटीमा, बनबसा और राज्य के अन्य इलाकों में नजूल भूमि से जुड़े लंबित मामलों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस फैसले से लंबे समय से भूमि अधिकारों का इंतजार कर रहे हजारों स्थानीय निवासियों को बड़ी राहत मिलेगी। भूमि नियमितीकरण की प्रक्रिया तेज होने से क्षेत्र का व्यवस्थित विकास भी संभव हो सकेगा।
युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग के तहत ₹200 करोड़ की नई स्किल डेवलपमेंट योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत राज्य के एक लाख से अधिक छात्रों को डिग्री के साथ-साथ मॉडर्न टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े स्किल डिप्लोमा कोर्स कराए जाएंगे। इसके अलावा, पर्वतीय क्षेत्रों में कुक्कुट पालन और डेयरी विकास को बढ़ावा देने के लिए Direct Benefit Transfer (DBT) के जरिए सीधी सब्सिडी देने का प्रावधान भी किया गया है।
प्रशासनिक पारदर्शिता और सुधार की दिशा में कदम उठाते हुए कैबिनेट ने समूह ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ के सरकारी कर्मचारियों के लिए अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के नियमों में ढील देते हुए आवश्यक भूमि की सीमा को 10 एकड़ से घटाकर 20,000 वर्ग मीटर कर दिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए सीमांत क्षेत्रों से सरकार चलाना हमारी प्राथमिकता है।