आईटीबीपी प्रमुख शत्रुजीत कपूर ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ जुलाई में हुए आमना-सामना की पुष्टि की है। सीमा सुरक्षा और आधुनिकीकरण पर जोर।
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को लेकर तनाव एक बार फिर सामने आया है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने पुष्टि की है कि जुलाई में अरुणाचल के अग्रिम क्षेत्रों में चीनी सैनिकों के साथ आईटीबीपी का आमना-सामना हुआ था। यह गतिरोध ऊपरी सुबनसिरी जिले के असफिला और ताकसिंग सेक्टर में बना हुआ है।
अलवर में आयोजित एक समारोह में डीजी शत्रुजीत कपूर ने बताया कि इस कठिन परिस्थिति में आईटीबीपी के शौर्य कमांडो ने अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में गश्त करना बल की मुख्य ताकत है। दोनों देशों के बीच इस सीमा विवाद को लेकर कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर कई दौर की उच्चस्तरीय बैठकें भी हो चुकी हैं।
सीमा पर चीन की आक्रामक गतिविधियों को देखते हुए भारत अपनी सैन्य ताकत को तेजी से आधुनिक बना रहा है। आईटीबीपी प्रमुख ने खुलासा किया कि आधुनिकीकरण कोष का बड़ा हिस्सा आधुनिक ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियों पर खर्च किया जा रहा है। इसके साथ ही हर सीमा सुरक्षा बटालियन में विशेष ड्रोन प्लाटून का गठन किया गया है और जवानों को कड़ा प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अग्रिम चौकियों पर भूमिगत बंकर बनाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। भारत सरकार सीमा पर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आईटीबीपी के जवान हर मौसम में देश की रक्षा के लिए पूरी मुस्तैदी से डटे हुए हैं।