नैनीताल
नैनीताल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, किच्छा और सिरौलीकलां में मतगणना पर रोक हटी
नैनीताल हाईकोर्ट ने किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका चुनाव की मतगणना पर लगी रोक हटाई। राज्य निर्वाचन आयोग की संशोधित अधिसूचना पर लगाई रोक।
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने ऊधमसिंह नगर जिले की किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका चुनाव की मतगणना स्थगित करने से संबंधित राज्य निर्वाचन आयोग की संशोधित अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी है। हाईकोर्ट के इस कड़े रुख के बाद दोनों नगर पालिकाओं में वोटों की गिनती का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
मामले की सुनवाई किच्छा के वार्ड नंबर-सात से सभासद प्रत्याशी अलीना मलिक की ओर से दायर याचिका पर हुई। याचिकाकर्ता का तर्क था कि निर्वाचन आयोग ने 7 सितंबर को चुनाव की अधिसूचना जारी की थी, जिसके तहत 22 सितंबर को मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। इसके बाद आयोग द्वारा अचानक 24 सितंबर को होने वाली मतगणना को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पूर्णतः विधि विरुद्ध और असंवैधानिक है।
खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए सख्त टिप्पणी की और पूछा कि जब मतदान प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है, तो मतगणना रोकने का क्या औचित्य है। कोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग की संशोधित अधिसूचना पर रोक लगाते हुए दोनों पक्षों को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद निर्वाचन आयोग को मतगणना के लिए नई तिथि घोषित करनी होगी।
उल्लेखनीय है कि सिरौलीकलां को किच्छा नगर पालिका से अलग कर नई पालिका बनाने के सरकार के फैसले को लेकर कानूनी विवाद चल रहा था। याचिकाकर्ताओं ने इसे नगर पालिका अधिनियम और संविधान के मानकों का उल्लंघन बताया था। हालांकि, हाईकोर्ट के ताजा आदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि न्यायिक विवादों के बावजूद लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मतदान के बाद मतगणना को रोका नहीं जा सकता।
