Report by : CWN Desk
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डॉ. सरस्वती कोहली को मिलेगा मथुरादत्त मठपाल स्मृति पुरस्कार, जानें उपलब्धि

कुमाउनी साहित्यकार डॉ. सरस्वती कोहली को मथुरादत्त मठपाल स्मृति पुरस्कार से नवाजा जाएगा। ‘आदलि कुशलि’ की संपादक के योगदान और उनकी पुस्तकों के बारे में यहाँ पढ़ें।

रामनगर। कुमाउनी भाषा और लोक संस्कृति के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य करने वाली डॉ. सरस्वती कोहली को इस वर्ष का प्रतिष्ठित ‘मथुरादत्त मठपाल स्मृति पुरस्कार’ प्रदान किया जाएगा। यह निर्णय हाल ही में ‘पुरस्कार निर्णायक समिति’ की एक महत्वपूर्ण बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। डॉ. कोहली वर्तमान में पिथौरागढ़ की निवासी हैं और कुमाउनी साहित्य के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
प्रो. गिरीश चंद्र पंत ने बैठक के विवरण साझा करते हुए बताया कि डॉ. कोहली का योगदान बहुआयामी है। उन्होंने लोक संस्कृति विषय पर शोध कार्य करने के साथ-साथ लोक साहित्य के संकलन के लिए कई गोष्ठियों और सेमिनारों का सफल आयोजन किया है। वे आकाशवाणी और दूरदर्शन के माध्यम से भी लोक संस्कृति की अलख जगा रही हैं। उनकी कविताओं और चर्चाओं को श्रोताओं द्वारा काफी पसंद किया जाता है।
साहित्यिक क्षेत्र में डॉ. सरस्वती कोहली का सबसे बड़ा योगदान उनकी मासिक पत्रिका ‘आदलि कुशलि’ का संपादन है। साल 2017 से लगातार प्रकाशित हो रही यह पत्रिका कुमाउनी बोली को नई पहचान दे रही है। उनकी तीन प्रसिद्ध पुस्तकें ‘कुमाउँनी कहावतें एवं मुहावरे’, ‘माँ से सुनी थी: कुमाऊं की लोक कथाएं’ और ‘भाना गंगानाथ: एक प्रेम कथा’ पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं।
यह सम्मान स्वर्गीय मथुरादत्त मठपाल की 85वीं जयंती के अवसर पर आगामी 29 जून को आयोजित एक भव्य समारोह में दिया जाएगा। निर्णायक समिति की इस बैठक में प्रो. गिरीश चंद्र पंत, चारु तिवारी, सुरेंद्र हाल्सी, नवेंदु मठपाल, निखिलेश उपाध्याय, नवीन तिवारी, नंदराम आर्य और भुवन पपनै जैसे प्रबुद्ध सदस्य उपस्थित रहे।

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