Report by : CWN Desk
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‘जो पहले न कह सका’: हरीश रावत ने विरोधियों पर साधा निशाना, साझा किया कार्यकाल का सच

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने विरोधियों को दिया करारा जवाब। आपदा प्रबंधन से लेकर उत्तराखंडियत तक, साझा किया अपने कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड।

देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत ने अपने हालिया ‘अर्जित अवकाश’ के बाद फेसबुक पर एक लंबी पोस्ट साझा की है। “जो पहले न कह सका” शीर्षक से लिखी गई इस पोस्ट में रावत ने न केवल अपने आलोचकों को जवाब दिया है, बल्कि 2014 से 2017 के अपने कार्यकाल को राज्य के लिए एक ‘स्वर्ण काल’ के रूप में प्रस्तुत किया है। उन्होंने विरोधियों द्वारा की जा रही टिप्पणियों को ‘लठ्ठ बरसाना’ करार दिया है।
हरीश रावत ने 2013 की भीषण आपदा के बाद के हालातों को याद करते हुए लिखा कि जब वह मुख्यमंत्री बने, तब राज्य की अर्थव्यवस्था और मनोबल दोनों ध्वस्त थे। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने मात्र तीन वर्षों में न केवल केदारनाथ का पुनर्निर्माण किया, बल्कि चारधाम यात्रा को भी पटरी पर लाए। रावत ने अफसोस जताते हुए कहा कि कांग्रेस का स्वभाव ‘शर्मीला’ है, इसलिए पार्टी अपने किए गए महान कार्यों का प्रचार नहीं कर पाई।
पलायन, बेरोजगारी और गैरसैंण जैसे ज्वलंत मुद्दों पर रावत ने वर्तमान सरकार को घेरते हुए कहा कि उनके समय में ‘उत्तराखंडी गवर्नेंस’ का मॉडल तैयार किया गया था। उन्होंने अपनी सरकार की पेंशन योजनाओं, महिला सशक्तिकरण के कदमों और ‘मेरा वृक्ष-मेरा धन’ जैसी बोनस योजनाओं का जिक्र किया, जो अब या तो बंद कर दी गई हैं या उनका नाम बदल दिया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नेपोलियन और जॉर्ज वाशिंगटन की तरह उन्होंने भी कभी हार को हार नहीं माना।
अंत में, रावत ने उत्तराखंडियत और हिमालयी राज्य के सपने को बचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि 2017 में यदि उन्हें और समय मिला होता, तो उत्तराखंड आज हिमाचल और सिक्किम से भी आगे होता। रावत ने स्पष्ट किया कि उम्र के इस पड़ाव में भी वह ‘जन विश्वास’ अर्जित करने के लिए निरंतर संघर्षरत हैं। उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति में एक बार फिर नई बहस छेड़ दी है।

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