हरिद्वार के दंपती को पुलिस और ईडी अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट की धमकी दी गई। झांसे में आकर दंपती ने एफडी तुड़वाकर 50 लाख रुपये ठगों को ट्रांसफर कर दिए।
देहरादून। उत्तराखंड के देहरादून और हरिद्वार क्षेत्र में साइबर अपराध का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। डिजिटल अरेस्ट का खौफ दिखाकर शातिर साइबर ठगों ने हरिद्वार के एक दंपती से 50 लाख रुपये की बड़ी रकम ठग ली। आरोपियों ने खुद को पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का वरिष्ठ अधिकारी बताकर पीड़ित दंपती को गंभीर कानूनी कार्रवाई की धमकी दी थी।
पीड़िता द्वारा देहरादून साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, यह घटना 14 अक्तूबर को शुरू हुई थी। पीड़िता के पति के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने दावा किया कि उनके पहचान दस्तावेज का इस्तेमाल कर दिल्ली के दरियागंज स्थित केनरा बैंक में एक फर्जी खाता खोला गया है। आरोपी ने आरोप लगाया कि इस खाते के जरिए जेट एयरवेज के पूर्व मालिक से जुड़े मामले में करोड़ों का अवैध लेनदेन हुआ है।
इसके बाद ठगों ने पूछताछ और फॉर्म भरवाने के बहाने दंपती की तमाम निजी और बैंक खातों से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां जुटा लीं। पीड़िता के पति को इमो (Imo) ऐप डाउनलोड करवाकर उस पर अकाउंट बनवाया गया। अगले दिन खुद को ईडी अधिकारी बताने वाले एक अन्य ठग ने संपर्क कर अदालत का डर दिखाया और दावा किया कि उन्हें घर के भीतर ही ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया गया है।
आरोपियों के लगातार बनाए जा रहे मानसिक दबाव के आगे दंपती विवश हो गए। 16 अक्तूबर को ठगों के निर्देश पर दंपती ने अपनी आईडीबीआई बैंक में जमा एफडी को तुड़वाया और आरटीजीएस (RTGS) के जरिए 50 लाख रुपये एक्सिस बैंक के एक बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए। रकम भेजने के बाद जब उन्हें संदेह हुआ, तब जाकर पूरे फ्रॉड का खुलासा हुआ। साइबर फ्रॉड से बचने के सुरक्षा उपायों के लिए आप Live Hindustan पर भी विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
ठगी का अहसास होते ही पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराकर अपनी गाढ़ी कमाई वापस दिलाने और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गुहार लगाई। साइबर थाना प्रभारी देवेंद्र नबियाल ने बताया कि शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। बैंक खातों के विवरण और कॉल डिटेल के आधार पर मामले की गहनता से जांच शुरू कर दी गई है।