Report by : CWN Desk
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गैरसैंण बजट सत्र 2026: विपक्ष का जोरदार हंगामा, कांग्रेस ने बनाई सरकार को घेरने की रणनीति

गैरसैंण (भराड़ीसैंण) विधानसभा सत्र में कांग्रेस ने भर्ती घोटाले, अंकिता भंडारी केस और महंगाई पर सरकार को घेरने का प्लान बनाया। यशपाल आर्य ने की लंबी सत्र की मांग।

गैरसैंण (भराड़ीसैंण): उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं। रविवार को नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस विधानमंडल दल की बैठक में सरकार को चौतरफा घेरने की रणनीति तैयार की गई है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह सदन में भर्ती घोटालों की जांच, महिला अपराधों में वृद्धि, अंकिता भंडारी हत्याकांड, भ्रष्टाचार और बढ़ती महंगाई जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सत्ता पक्ष से जवाब मांगेगी। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जनता की समस्याओं पर चर्चा करने से बच रही है।
बैठक के दौरान नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सत्र की अवधि बढ़ाने की पुरजोर मांग की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विधानसभा वह सर्वोच्च मंच है, जहाँ जनता की आवाज़ उठाई जाती है। कांग्रेस की मांग है कि यह सत्र कम से कम 20 से 22 दिन तक चलना चाहिए ताकि प्रदेश की बुनियादी सुविधाओं और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हो सके। आर्य ने चेतावनी दी है कि यदि सत्र की अवधि कम रखी गई, तो सदन से लेकर सड़क तक कड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
सत्र शुरू होने से पहले एक विशेष घटनाक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल ने नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य से उनके आवास पर शिष्टाचार भेंट की। हालांकि, इसे एक सामान्य लोकतांत्रिक परंपरा बताया जा रहा है, लेकिन विपक्ष के तेवर ढीले पड़ते नज़र नहीं आ रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह और उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने ‘जल जीवन मिशन’ में कथित भ्रष्टाचार और ऊर्जा प्रदेश में हर महीने बढ़ती बिजली की दरों को लेकर सरकार की घेरेबंदी करने का एलान किया है।
विपक्ष का सबसे बड़ा विरोध राज्यपाल के अभिभाषण के तुरंत बाद बजट पटल पर रखे जाने को लेकर है। कांग्रेस का दावा है कि संसदीय इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है, जो लोकतांत्रिक मान्यताओं के खिलाफ है। बैठक में 14 विधायक उपस्थित रहे, जबकि कुछ अन्य विधायक किन्हीं कारणों से शामिल नहीं हो पाए। अब देखना यह होगा कि गैरसैंण की इस कड़ाके की ठंड में सदन के भीतर सियासी गर्मी कितनी बढ़ती है और सरकार विपक्ष के इन तीखे सवालों का क्या जवाब देती है।

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