Report by : CWN Desk
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गीता धामी का आह्वान: माल्टा महोत्सव से मजबूत होगी उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था

गीता धामी ने माल्टा महोत्सव के माध्यम से उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों और काश्तकारों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। जानें कैसे माल्टा बदल सकता है पहाड़ की तकदीर।

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की धर्मपत्नी श्रीमती गीता धामी ने ‘माल्टा’ को उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कृषि का गौरव बताया है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि माल्टा केवल एक फल नहीं, बल्कि हमारी जलवायु और मिट्टी की विशिष्ट पहचान है। उन्होंने विश्वास जताया कि माल्टा महोत्सव जैसे आयोजनों से स्थानीय काश्तकारों और स्वयं सहायता समूहों को बड़ा आर्थिक संबल मिलेगा।
गीता धामी ने रेखांकित किया कि ऐसे प्रयासों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि जब हम अपने संसाधनों का सही उपयोग करेंगे, तभी पहाड़ के लोगों को आगे बढ़ने के वास्तविक अवसर मिलेंगे। यह पहल काश्तकारों को सीधे बाजार से जोड़कर उन्हें समृद्धि की ओर ले जाने का एक सशक्त माध्यम बनेगी।
स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के दौर में माल्टा के महत्व पर चर्चा करते हुए उन्होंने इसे ‘सुपरफूड’ बताया। माल्टा पोषक तत्वों और विटामिन-सी से भरपूर है, जो प्राकृतिक रूप से निरोगी जीवनशैली के लिए अनिवार्य है। गीता धामी के अनुसार, हमारा लक्ष्य उत्तराखंड के इन जैविक उत्पादों को देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी नई पहचान दिलाना है।
उन्होंने केवल माल्टा तक ही सीमित न रहकर पहाड़ के अन्य पारंपरिक उत्पादों (जैसे मंडुआ, झंगोरा) को भी बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय कृषि को सुदृढ़ करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। जब हमारी खेती मजबूत होगी, तभी पलायन जैसी समस्याओं पर भी लगाम लग सकेगी।
अंत में, उन्होंने एक प्रेरक संदेश देते हुए कहा कि जिस तरह कोई पेड़ अपनी जड़ों से जुड़कर ही हरा रहता है, वैसे ही हमें भी अपनी परंपराओं और जड़ों से जुड़ा रहना होगा। अपनी पहचान को बचाए रखना और पारंपरिक उत्पादों को अपनाना ही उत्तराखंड की वास्तविक उन्नति का मार्ग है।

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