Report by : कालू वर्मा
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हरिद्वार के MCH विंग NPPL अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने फेफड़ों में दूध जाने से गंभीर नवजात बच्चे की 6 दिन के इलाज के बाद जान बचाई।

हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले से चिकित्सा क्षेत्र की एक राहत भरी खबर सामने आई है। शहर के प्रसिद्ध एमसीएच विंग एनपीपीएल हॉस्पिटल में गंभीर हालत में भर्ती कराए गए एक नवजात बच्चे की जान डॉक्टरों ने बचा ली है। बच्चे को दो अलग-अलग अस्पतालों से रेफर करके यहां लाया गया था। अस्पताल पहुंचते समय बच्चा बहुत तेजी से हांफ रहा था और ऑक्सीजन की कमी से उसका शरीर नीला पड़ गया था।
चिकित्सकीय जांच में पता चला कि दूध पीते समय फेफड़ों में दूध चले जाने के कारण बच्चे की सांस की नली बुरी तरह प्रभावित हुई थी। इससे उसकी सांस लेने की प्रक्रिया ठप हो गई थी और वह रेस्पिरेटरी फेल्योर की तरफ बढ़ रहा था। नवजात की अत्यंत नाजुक स्थिति को देखकर अस्पताल की एनआईसीयू टीम ने बिना समय गंवाए उसका तत्काल इलाज शुरू किया और उसे इमरजेंसी सपोर्ट दिया।
वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास गुप्ता के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने बच्चे पर लगातार नजर बनाए रखी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बच्चे को तुरंत तीन दिनों के लिए वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। जब स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ, तब उसे अगले तीन दिनों तक सेमी-वेंटिलेटर पर रखा गया। इस पूरी अवधि के दौरान एनआईसीयू टीम ने बच्चे की श्वसन प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखा।
छह दिनों के कठिन और गहन उपचार के बाद बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हो गया। परिजनों को जब डॉक्टरों ने उनका स्वस्थ बच्चा सौंपा, तो उनकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए। पीड़ित परिवार हरिद्वार के नेहरू कॉलोनी, सलेमपुर क्षेत्र का निवासी है। पिता राहुल कुमार ने नवजात की जान बचाने के लिए डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की टीम का दिल से आभार व्यक्त किया।
डॉ. विकास गुप्ता के साथ इस सफल इलाज में डॉ. मोहम्मद सलमान, डॉ. शुभम, डॉ. अक्षत और डॉ. स्नेहा की मुख्य भूमिका रही। यह मामला साबित करता है कि नवजात शिशुओं की आपात स्थिति में सही समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा और एनआईसीयू सुविधा उपलब्ध होने से किसी भी अनहोनी को टाला जा सकता है।

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