नैनीताल
ज्योलिकोट जल संकट: 2 मौतों के बाद धामी सरकार का जल संस्थान पर बड़ा चाबुक
नैनीताल के ज्योलिकोट में दूषित पानी से 2 मौतों के बाद धामी सरकार का बड़ा एक्शन। जल संस्थान और पेयजल निगम के 6 अधिकारी निलंबित। पढ़ें पूरी खबर।
नैनीताल। जिले के ज्योलिकोट और आसपास के क्षेत्रों में दूषित पेयजल की आपूर्ति से फैली बीमारियों पर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। दूषित पानी पीने से एक छात्र और एक विवाहिता की मौत होने तथा सैकड़ों ग्रामीणों के बीमार पड़ने के मामले में धामी सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। लापरवाही बरतने के आरोप में जल संस्थान और पेयजल निगम के छह अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। राज्य गठन के बाद जन स्वास्थ्य से जुड़े मामले में यह सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई मानी जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ज्योलिकोट क्षेत्र में लंबे समय से गंदे पानी की सप्लाई हो रही थी, जिससे इलाके में डायरिया और पीलिया जैसी जल जनित बीमारियां फैल गईं। ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बावजूद अधिकारियों ने मामले पर ध्यान नहीं दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में एक विशेष जांच समिति का गठन किया था। समिति की रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के बाद यह सख्त कदम उठाया गया।
शासन द्वारा जारी निलंबन आदेश के तहत जल संस्थान के प्रभारी अधीक्षण अभियंता विशाल कुमार, सहायक अभियंता मोहन सिंह रावत और अपर सहायक अभियंता रवींद्र को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा पेयजल निगम भीमताल शाखा के प्रभारी अधिशासी अभियंता शशिपाल सिंह, प्रभारी सहायक अभियंता संजय कुमार आर्या और कनिष्ठ अभियंता दीपांशु शर्मा पर भी गाज गिरी है। वहीं, नैनीताल जल संस्थान के अधिशासी अभियंता अनीश पिल्लई को भविष्य के लिए कठोर चेतावनी दी गई है।
हाईकोर्ट द्वारा भी इस गंभीर मामले का संज्ञान लिया गया था, जिसके बाद शासन स्तर पर हलचल और तेज हो गई थी। इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के बाद पेयजल निगम और जल संस्थान के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। सरकार की ओर से व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए लालकुआं के अधिशासी अभियंता नंदकिशोर को अधीक्षण अभियंता हल्द्वानी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति जल्द सुनिश्चित की जा सके।
