CWN Desk

आरबीआई के कड़े फैसले और क्रूड ऑयल में तेजी से भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट। सेंसेक्स 1,045 अंक टूटा। जानें गिरावट के 5 मुख्य कारण।

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली का माहौल देखने को मिला। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के नीतिगत फैसलों और वैश्विक स्तर पर मिले नकारात्मक संकेतों के कारण बाजार में चौतरफा गिरावट दर्ज की गई। बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1,045.46 अंक टूटकर 71,593.24 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 371.25 अंक गिरकर 22,231.80 के स्तर पर आ गया।
इस एक दिन की भारी बिकवाली के चलते शेयर बाजार के निवेशकों को लगभग ₹11.37 लाख करोड़ का बड़ा नुकसान हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक ने लगभग चार साल में पहली बार रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दिया है। इसके साथ ही आरबीआई ने अपने नीतिगत रुख को ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है। केंद्रीय बैंक के इस कड़े रुख से बाजार में निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें खत्म हो गई हैं।
बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण भी प्रमुख रहे। मध्य पूर्व में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 4.25 फीसदी बढ़कर $104.46 प्रति बैरल के पार पहुंच गया। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, इसलिए कच्चे तेल के दामों में वृद्धि से देश में महंगाई और आयात बिल बढ़ने की चिंताएं गहराई हैं।
इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की ओर से भारतीय बाजारों में लगातार बिकवाली की जा रही है। केवल एक दिन में विदेशी निवेशकों ने ₹6,121 करोड़ से अधिक के शेयर बेचे। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंका तथा वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी ने भी निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है। रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोरी के स्तर पर बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दर-संवेदनशील क्षेत्रों जैसे बैंकिंग, ऑटो और रियल्टी पर निकट अवधि में दबाव बना रह सकता है। हालांकि, लंबे समय के निवेशकों के लिए इस प्रकार का सुधार बुनियादी रूप से मजबूत कंपनियों में निवेश के अवसर भी प्रदान करता है।