Report by : CWN Desk
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ओम पर्वत से फिर गायब हुई प्राकृतिक ॐ की आकृति: बर्फ पिघलने से चिंता में श्रद्धालु और पर्यावरणविद

धारचूला में 15,700 फीट ऊंचे ओम पर्वत से बर्फ फिर पिघल गई है। ॐ की आकृति गायब होने से श्रद्धालुओं और पर्यावरणविदों में गहरी चिंता व्यापत है।

धारचूला। विश्व प्रसिद्ध और आस्था के केंद्र ओम पर्वत पर एक बार फिर गंभीर पर्यावरण संकट गहरा गया है। उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित यह पवित्र पर्वत एक बार फिर पूरी तरह से बर्फ विहीन हो गया है। पर्वत की ढलानों से बर्फ पिघलने के कारण इस पर प्राकृतिक रूप से बनने वाली ‘ॐ’ की दिव्य आकृति पूरी तरह गायब हो गई है।
स्थानीय निवासी उमा सनवाल गुंज्याल ने सीमांत धारचूला लौटने के बाद पर्वत की ताजा स्थिति साझा की। उन्होंने बताया कि पर्वत पर बर्फ की प्राकृतिक आकृति अब नजर नहीं आ रही है। समुद्रतल से लगभग 15,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस पवित्र स्थान से बर्फ का गायब होना आस्थावान श्रद्धालुओं और पर्यावरणविदों के लिए बेहद चिंता का विषय बन गया है।
हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते तापमान और वैश्विक उष्मीकरण (Global Warming) के असर को समझने के लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट देख सकते हैं।
यह पहला मौका नहीं है जब ओम पर्वत से बर्फ पूरी तरह पिघली हो। इससे पूर्व अगस्त 2024, अगस्त 2025 और हाल ही में बीते जनवरी माह में भी पर्वत से बर्फ गायब होने के मामले सामने आ चुके हैं। बार-बार बर्फ पिघलने और ‘ॐ’ की आकृति के गायब होने से उच्च हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी विक्षोभ में कमी और अनियमित बर्फबारी के कारण यह स्थिति पैदा हो रही है। समय रहते यदि पर्यावरण संरक्षण पर कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो इस पावन धरोहर का प्राकृतिक स्वरूप हमेशा के लिए प्रभावित हो सकता है।

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