Report by : CWN Desk
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कैंची धाम में बर्फबारी का सच: एआई (AI) ने फैलाया भ्रम, फर्जी फोटो देखकर पहुंच रहे पर्यटकों को लग रही मायूसी

इंटरनेट मीडिया पर कैंची धाम और जागेश्वर धाम की एआई (AI) जनरेटेड बर्फबारी की तस्वीरें वायरल। पुलिस ने फर्जी फोटो फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के दिए निर्देश।

नैनीताल: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता दुरुपयोग अब देवभूमि उत्तराखंड में पर्यटन और कानून व्यवस्था के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। हाल ही में सोशल मीडिया पर बाबा नीम करौली के प्रसिद्ध धाम कैंची धाम और जागेश्वर धाम की कुछ तस्वीरें वायरल हुईं, जिनमें भारी बर्फबारी का अद्भुत नजारा दिखाया गया है। हालांकि, सच यह है कि ये तस्वीरें पूरी तरह फर्जी और एआई जनरेटेड (AI Generated) हैं, जिसका हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है।
शुक्रवार को उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी तो हुई, लेकिन कैंची धाम की जो तस्वीरें इंटरनेट पर प्रसारित की जा रही हैं, वे कृत्रिम रूप से बनाई गई हैं। इन मोहक तस्वीरों को देखकर बड़ी संख्या में पर्यटक कैंची धाम पहुंच रहे हैं, लेकिन वहां पहुंचने पर उनके हाथ केवल मायूसी लग रही है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों का कहना है कि लोग एक-दूसरे से इन तस्वीरों की सच्चाई पूछ रहे हैं और जब उन्हें पता चलता है कि यह धोखा है, तो वे ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
एआई से तैयार इन तस्वीरों में मंदिर के चारों ओर पहाड़ों पर भारी बर्फ की चादर दिखाई गई है। इसे असली मानकर लोग दूर-दराज से सफर तय कर रहे हैं, जिससे सड़कों पर भीड़ भी बढ़ रही है। इसी तरह की भ्रामकता जागेश्वर धाम को लेकर भी फैलाई गई है। जानकारों का कहना है कि इस तरह के कृत्य से न केवल पर्यटकों को परेशानी होती है, बल्कि यह क्षेत्र की छवि को भी प्रभावित करता है।
प्रशासन ने अब इस मामले को गंभीरता से लिया है। एसपी सिटी मनोज कत्याल ने बताया कि पुलिस का सोशल मीडिया लैब पूरी तरह एक्टिव है। इंटरनेट मीडिया पर बर्फबारी के फेक एआई जनरेटेड फोटो और वीडियो अपलोड करने वाले यूजर्स को चिह्नित किया जा रहा है। भ्रामक खबरें फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे किसी भी स्थान पर जाने से पहले आधिकारिक सूत्रों से मौसम और स्थिति की पुष्टि जरूर करें।

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