Report by : CWN Desk
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भीमताल की पहली महिला नाविक: गीता बिष्ट ने चप्पू थामकर रचा इतिहास, पर्यटकों की बनीं पहली पसंद

भीमताल झील में पहली बार महिला नाविक गीता बिष्ट ने संभाली कमान। पर्यटकों को सैर कराने के साथ सुनाती हैं अनसुने राज। आत्मनिर्भर उत्तराखंड की प्रेरक कहानी।

भीमताल: देवभूमि उत्तराखंड की महिलाएं अब केवल घर की चहारदीवारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे हर चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में अपनी धाक जमा रही हैं। नैनीताल जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भीमताल में गीता बिष्ट ने एक नई मिसाल पेश की है। वह भीमताल झील की पहली महिला नाविक बन गई हैं, जो पेशेवर रूप से पर्यटकों को अपनी नाव से झील की सैर करा रही हैं।
गीता बिष्ट ने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने के लिए नौकायन को स्वरोजगार के रूप में चुना है। वह प्रतिदिन अपने घरेलू कार्यों को निपटाने के बाद झील पर पहुंचती हैं और अपनी बारी का इंतजार करती हैं। गीता न केवल पर्यटकों को नाव की सैर कराती हैं, बल्कि उन्हें भीमताल से जुड़ी ऐतिहासिक कहानियां और अनसुने राज भी सुनाती हैं, जिससे सैलानी उनके मुरीद हो रहे हैं।
पर्यटकों में गीता के प्रति विशेष उत्साह देखा जा रहा है। हाल ही में उनकी नाव की सवारी करने वाले पर्यटक विनोद सिरोही ने बताया कि उत्तराखंड की यह महिला बेहद हिम्मती और जुझारू है। उन्होंने कहा कि जहाँ कुछ लोग गलत रास्तों पर भटक जाते हैं, वहीं गीता जैसी महिलाएं चुनौतीपूर्ण काम कर ईमानदारी से आजीविका कमा रही हैं। पर्यटकों के अनुसार, गीता का व्यवहार और उनका काम करने का तरीका बेहद प्रभावित करने वाला है।
महिला सशक्तिकरण की यह कहानी भीमताल आने वाले हर सैलानी के लिए प्रेरणा बन गई है। गीता का यह कदम साबित करता है कि मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो कोई भी पेशा केवल पुरुषों तक सीमित नहीं रह सकता। अब भीमताल झील में चप्पू चलाती गीता को देखना यहाँ के पर्यटन का एक नया और गौरवशाली आकर्षण बन गया है।

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