Report by : CWN Desk
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UCC इन उत्तराखंड: समान नागरिक संहिता का एक साल बेमिसाल, संशोधन अध्यादेश के साथ अब और प्रभावी हुए नियम

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) के लागू होने का एक वर्ष पूरा। राज्यपाल ने संशोधन अध्यादेश को दी हरी झंडी, लिव-इन और विवाह नियमों में हुए बड़े बदलाव।

देहरादून: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के एक वर्ष पूरे होने के अवसर पर राज्य सरकार ने इसे और अधिक पारदर्शी बना दिया है। राज्यपाल ने सरकार द्वारा लाए गए यूसीसी संशोधन अध्यादेश को अपनी स्वीकृति दे दी है। इस कदम का उद्देश्य संहिता के प्रशासनिक और दंडात्मक प्रावधानों में सुधार करना है ताकि इसका क्रियान्वयन सुचारू रूप से हो सके।
अध्यादेश के तहत सबसे बड़ा बदलाव कानूनी शब्दावली में किया गया है। अब आपराधिक प्रक्रिया के लिए ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023’ और दंडात्मक प्रावधानों के लिए ‘भारतीय न्याय संहिता, 2023’ को आधार बनाया गया है। साथ ही, उत्तराधिकार के नियमों में ‘विधवा’ शब्द के स्थान पर अब ‘जीवनसाथी’ शब्द का प्रयोग किया जाएगा, जो लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम है।
विवाह और लिव-इन संबंधों को लेकर भी नियमों को सख्त किया गया है। यदि विवाह के समय कोई अपनी पहचान गलत बताता है, तो इसे विवाह निरस्तीकरण का ठोस आधार माना जाएगा। इसके अलावा, लिव-इन संबंधों में धोखाधड़ी या दबाव बनाने पर कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। अब लिव-इन संबंध खत्म होने पर पंजीयक (Registrar) द्वारा समाप्ति प्रमाण पत्र जारी करना अनिवार्य होगा।
प्रशासनिक स्तर पर, पंजीकरण की प्रक्रिया को डिजिटल और समयबद्ध बनाया गया है। यदि उप-पंजीयक तय समय में कार्रवाई नहीं करते, तो मामला स्वतः उच्च अधिकारियों को अग्रेषित हो जाएगा। पंजीकरण निरस्त करने की अंतिम शक्ति अब पंजीयक जनरल के पास होगी। ये सभी सुधार सुनिश्चित करेंगे कि कानून का दुरुपयोग न हो और आम जनता को न्याय मिलने में सुगमता रहे।

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