उत्तराखण्ड
उत्तराखंड के बहादुर बच्चों को मिलेगा सम्मान, वीरता पुरस्कार के लिए बनेगा नया प्रस्ताव
उत्तराखंड में 3 साल से राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार न मिलने पर राज्य बाल कल्याण परिषद ने लिया बड़ा फैसला। अब राज्य स्तर पर सम्मानित होंगे साहसी बच्चे। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।
देहरादून: उत्तराखंड की देवभूमि न केवल अपनी सुंदरता के लिए बल्कि यहाँ के बच्चों के अदम्य साहस के लिए भी जानी जाती है। पिछले तीन वर्षों से राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार की सूची में राज्य के बच्चों का नाम शामिल न होने के बाद अब राज्य बाल कल्याण परिषद ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। परिषद की महासचिव पुष्पा मानस ने घोषणा की है कि राज्य के बहादुर बच्चों को अब प्रादेशिक स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।
राज्य में गुलदार और भालू के बढ़ते हमलों के बीच बच्चे लाठी और दराती लेकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। इस कठिन परिस्थिति में भी कई बच्चों ने अपनी और दूसरों की जान बचाकर अदम्य साहस का परिचय दिया है। भारतीय बाल कल्याण परिषद द्वारा पिछले कुछ वर्षों से आवेदन न मांगे जाने के कारण इन बच्चों को राष्ट्रीय मंच नहीं मिल सका। इसी कमी को पूरा करने के लिए अब फरवरी या मार्च में होने वाली परिषद की बैठक में एक विशेष प्रस्ताव लाया जाएगा।
परिषद की महासचिव के अनुसार, इस पुरस्कार के लिए प्रायोजक भी तैयार हैं और शासन स्तर पर भी सकारात्मक रुख दिख रहा है। गौरतलब है कि राजभवन की ओर से भी पूर्व में वीरता पुरस्कारों के लिए मौखिक आश्वासन मिल चुका है। परिषद के अध्यक्ष स्वयं राज्यपाल हैं, जिससे इस प्रस्ताव के पारित होने की प्रबल संभावना है। राज्य स्तर पर पुरस्कार मिलने से बच्चों का मनोबल बढ़ेगा और उनकी वीरता को उचित पहचान मिलेगी।
उत्तराखंड का वीरता का इतिहास काफी समृद्ध रहा है। अब तक राज्य के 15 बच्चों को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। इसमें टिहरी के हरीश राणा (2003) से लेकर रुद्रप्रयाग के नितिन रावत (2022) तक के नाम शामिल हैं। सरकार और परिषद का यह नया प्रयास सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में किसी भी बहादुर बच्चे का साहस अनदेखा न रह जाए।
