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उत्तराखण्ड

चारधाम में गैर-हिंदुओं की एंट्री होगी बैन? बद्रीनाथ-केदारनाथ समेत 50 मंदिरों पर बड़ा फैसला

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उत्तराखंड के चारधाम और 50 अन्य मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की तैयारी। मंदिर समितियों के प्रस्ताव पर सरकार की सहमति। जानें क्या हैं नए नियम।

देहरादून: उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध चारधाम (बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री) समेत 50 प्रमुख मंदिरों में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मंदिर समितियों द्वारा दिए गए प्रस्ताव के अनुसार, इन पवित्र स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने की तैयारी चल रही है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) और अन्य धामों की समितियों के इस प्रस्ताव पर राज्य सरकार ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है।
इस प्रतिबंध के दायरे से उन लोगों को बाहर रखा गया है जो सनातन धर्म की विभिन्न शाखाओं से जुड़े हैं। मंदिर समितियों ने स्पष्ट किया है कि सिख, जैन और बौद्ध धर्म के अनुयायियों पर यह रोक लागू नहीं होगी, क्योंकि उन्हें हिंदू धर्म का ही एक अभिन्न हिस्सा माना जाता है। BKTC के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के अनुसार, आगामी बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को आधिकारिक रूप से रखा जाएगा, जिसमें तीर्थ पुरोहित और धर्माधिकारी भी शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले पर संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि कोई भी अंतिम निर्णय तीर्थ पुरोहितों की आस्था और संत समाज की राय के आधार पर ही लिया जाएगा। सरकार फिलहाल इन धामों के संचालन से जुड़े पुराने कानूनों का बारीकी से अध्ययन कर रही है। सीएम ने स्पष्ट किया कि धार्मिक संगठनों की भावनाओं का सम्मान करना सरकार की प्राथमिकता है।
गैर-हिंदू की परिभाषा को स्पष्ट करते हुए मंदिर समिति ने कहा कि यह प्रतिबंध उन लोगों के लिए है जिनकी सनातन धर्म और इसकी परंपराओं में आस्था नहीं है। गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर समितियों ने भी इस प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी है। इसके तहत केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि गंगा घाटों पर भी प्रवेश के नियमों को सख्त किया जाएगा ताकि धामों की आध्यात्मिक शुद्धता बनी रहे।
मंदिर समिति के अधीन आने वाले प्रमुख स्थल:
कुल 48 से अधिक मंदिरों में यह नियम लागू हो सकता है, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
* केदारनाथ और बद्रीनाथ मुख्य धाम
* तुंगनाथ, मध्यमहेश्वर और भविष्य बद्री
* नरसिंह मंदिर (जोशीमठ) और विश्वनाथ मंदिर
* कालीमठ और त्रियुगीनारायण मंदिर

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