उत्तराखंड एसटीएफ ने नैनीताल में डार्क वेब और डिस्कॉर्ड के जरिए बाल यौन शोषण सामग्री डाउनलोड करने वाले युवक पर शिकंजा कसा है। 2026 में अब तक 150 मामले दर्ज।
हल्द्वानी। उत्तराखंड पुलिस और एसटीएफ ने बच्चों के ऑनलाइन यौन शोषण और अश्लील सामग्री के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। एनसीएमईसी (NCMEC/CyberTipline) और एनसीआरपी से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर वर्ष 2026 में अब तक राज्यभर में लगभग 150 अभियोग पंजीकृत किए जा चुके हैं। इसी कड़ी में जनपद नैनीताल के हल्द्वानी कोतवाली क्षेत्र में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है।
मामले के अनुसार, 25 अक्टूबर 2026 को एनसीआरपी के माध्यम से प्राप्त 11 शिकायतों के आधार पर पुलिस ने पॉक्सो अधिनियम और आईटी एक्ट की धारा 67(B) के तहत मुकदमा दर्ज किया था। विवेचना के दौरान तकनीकी साक्ष्यों से पता चला कि आरोपी डार्क वेब और डिस्कॉर्ड के माध्यम से बाल यौन शोषण से जुड़ी अश्लील सामग्री डाउनलोड कर रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि विधि विवादित किशोर द्वारा स्वयं भी एक बालक के साथ अश्लील कृत्य की वीडियोग्राफी की गई थी।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से लेनोवो टैबलेट, एचपी लैपटॉप, दो रियलमी स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए। उपकरणों की तकनीकी जांच में ब्राउजर की हिस्ट्री, रीसायकल बिन और ‘TIME’ नामक फोल्डर में भारी मात्रा में अश्लील वीडियो व फोटो मिले। गूगल क्रोम और ब्रेव ब्राउजर के डिजिटल साक्ष्यों ने साइबर टिपलाइन से मिली शिकायतों की पुष्टि की है।
एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सरकार और पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। साइबर टेक्निकल टीम लगातार ऐसे मामलों पर पैनी नजर बनाए हुए है और प्रदेश के विभिन्न जनपदों में समन्वय स्थापित कर प्रभावी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने आमजन से भी अपील की है कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें और ऐसी किसी भी अवैध सामग्री को साझा करने से बचें।