आइसलैंड के ज्वालामुखियों से उत्तराखंड की पहाड़ियों तक, पायलट गिसली पिछले 32 सालों से हेलीकॉप्टर उड़ा रहे हैं। जानिए उनके संघर्ष और प्रेरणादायक सफर की कहानी।
हल्द्वानी। आइसलैंड की बर्फीली वादियों, समुद्र और धधकते ज्वालामुखियों के ऊपर उड़ान भरने वाले अनुभवी पायलट गिसली इन दिनों उत्तराखंड की पहाड़ियों में हेलीकॉप्टर उड़ा रहे हैं। हेरिटेज एविएशन के साथ जुड़े 32 साल के अनुभवी पायलट गिसली फिलहाल हल्द्वानी से पिथौरागढ़, मुनस्यारी और बागेश्वर के लिए नियमित हवाई सेवाएं दे रहे हैं। चारधाम यात्रा के दौरान जब उत्तराखंड में पायलटों की कमी होती है, तब विमानन कंपनी उन्हें विशेष रूप से भारत बुलाती है।

गिसली ने 25 वर्ष की उम्र में आसमान में उड़ने की शुरुआत की थी। उन्होंने ऑस्ट्रिया से व्यावसायिक फ्लाइंग की ट्रेनिंग ली और इसके बाद आइसलैंड, ऑस्ट्रिया तथा भूटान में अपनी सेवाएं दीं। अब तक लगभग 5,000 घंटे की सफल उड़ान भर चुके गिसली के लिए हिमालय की कठिन पहाड़ियों में उड़ान भरना बेहद सुखद अनुभव है। उनका लंबा अनुभव विषम मौसम और विपरीत परिस्थितियों में सुरक्षित लैंडिंग में बहुत मददगार साबित होता है। हाल ही में उन्होंने पिथौरागढ़ से एक गंभीर मरीज को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित हल्द्वानी पहुँचाया।

गिसली बताते हैं कि एक पेशेवर पायलट बनने का सफर बिल्कुल आसान नहीं था। वर्ष 1997 में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद पहली नौकरी पाने में उन्हें दस साल से अधिक का लंबा समय लगा। पायलट ट्रेनिंग का खर्च जुटाने के लिए उन्हें अपनी कार तक बेचनी पड़ी थी। बेहद कम बजट होने के कारण उन्होंने परिवार के पारंपरिक व्यवसाय का रुख किया और मछली पकड़ने वाले जहाजों पर काम किया। समुद्र में सी-सिकनेस से जूझते हुए उन्होंने अपनी ट्रेनिंग के लिए पैसे जुटाए।
वर्ष 2010 में आइसलैंड के एजाफजल्लाजोकुल ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान उन्हें बड़े हेलीकॉप्टर में ऑब्जर्वर और को-पायलट के रूप में उड़ान भरने का मौका मिला। यहीं से उनके करियर ने एक नई उड़ान पकड़ी। वे हॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग के दौरान भी हेलीकॉप्टर उड़ा चुके हैं। इस दौरान उन्हें प्रसिद्ध हॉलीवुड अभिनेता और पायलट टॉम क्रूज के साथ दो दिन बिताने का अवसर भी मिला।
गिसली का कहना है कि हेलीकॉप्टर उड़ाना केवल एक पेशा नहीं, बल्कि दिल का जुनून है। आइसलैंड में लंबे दिन और छोटी रात के कारण उन्होंने दिन-रात हर मौसम में उड़ानें भरी हैं। उनका मानना है कि नए पायलटों को इस क्षेत्र में तभी कदम रखना चाहिए, जब उन्हें आसमान से बेइंतहा प्यार हो।
