उत्तराखंड के कालाढूंगी जंगल में हाथी के गोबर में प्लास्टिक मिलने से हड़कंप मच गया है। वन्यजीवों के लिए प्लास्टिक कचरा कैसे बन रहा है जानलेवा, जानें पूरी खबर।
कालाढूंगी। उत्तराखंड के जंगलों और वन्यजीवों के आसपास फैलता प्लास्टिक कचरा अब बेजुबान जानवरों के लिए जानलेवा साबित होने लगा है। कालाढूंगी से सामने आई एक चौंकाने वाली तस्वीर ने वन्यजीव प्रेमियों और प्रशासन की नींद उड़ा दी है। इस तस्वीर में हाथी के गोबर के बीच पीले रंग की प्लास्टिक की पन्नी साफ तौर पर दिखाई दे रही है, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि जंगली जानवर किस तरह प्लास्टिक प्रदूषण का शिकार हो रहे हैं।
नेचर गाइड व कॉर्बेट ग्राम विकास समिति के सचिव मोहन पांडे ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि भोजन की तलाश में हाथी अक्सर जंगलों से निकलकर आबादी वाले इलाकों, सड़कों के किनारे और कूड़ा डालने वाली जगहों तक पहुंच जाते हैं। इस दौरान खुले में पड़े प्लास्टिक के पैकेट और थैलियां अनजाने में उनके पेट में चली जाती हैं, जिससे उनकी जान को बड़ा खतरा पैदा हो जाता है।
जानवरों द्वारा खाया गया यह प्लास्टिक उनके पाचन तंत्र में फंस जाता है और आंतों में गंभीर रुकावट पैदा करता है। इसके कारण भोजन का सामान्य पाचन रुक जाता है और हाथियों के स्वास्थ्य पर बेहद बुरा असर पड़ता है। समय रहते यदि जंगलों और आसपास के क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे का उचित निस्तारण नहीं किया गया, तो यह वन्यजीवों के लिए और भी ज्यादा घातक सिद्ध हो सकता है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों के बफर जोन और आसपास के पर्यटन स्थलों पर कचरा प्रबंधन को सख्त करने की सख्त जरूरत है। बेजुबानों की जिंदगी बचाने के लिए प्रशासन और आम जनता दोनों को मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।
