दिल्ली के राजघाट पर मौन धरने पर बैठे अंकिता भंडारी के माता-पिता को पुलिस ने हिरासत में लिया। खींचातानी में मां बेहोश होकर अस्पताल में भर्ती।
नई दिल्ली। राजघाट स्थित महात्मा गांधी के समाधि स्थल पर शांतिपूर्ण तरीके से ‘मौन व्रत’ पर बैठे अंकिता भंडारी के माता-पिता और सामाजिक कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई के दौरान धक्का-मुक्की और खींचातानी के बीच पीड़िता की मां सोनी देवी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। वे परिसर में ही बेहोश होकर गिर पड़ीं, जिसके बाद उन्हें तुरंत इलाज के लिए नजदीकी बुराड़ी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अंकिता भंडारी के पिता वीरेंद्र भंडारी, मां सोनी देवी और सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना बुधवार को राजघाट पर गांधी जी की समाधि के समक्ष मौन धरने पर बैठे थे। वे अपनी बेटी के लिए न्याय और मामले से जुड़े मुख्य चेहरे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे थे। शाम के समय दिल्ली पुलिस के जवानों ने सुरक्षा नियमों का हवाला देते हुए धरना दे रहे लोगों को वहां से हटने का निर्देश दिया और इनकार करने पर जबरन गाड़ियों में बैठा लिया।
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि राजघाट एक राष्ट्रीय समाधि स्थल है और यह क्षेत्र किसी भी प्रकार के प्रदर्शन के लिए अधिकृत नहीं है। पुलिस का दावा है कि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा नियमों को बनाए रखने के लिए प्रदर्शनकारियों को हटाने की प्रक्रिया अपनाई गई। वहीं, अंकिता के पिता और अन्य समर्थकों को हिरासत में लेकर थाने भेज दिया गया है, जिससे आम जनता और सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
पीड़ित परिवार की मुख्य मांग है कि अंकिता पर जिस तथाकथित ‘विशेष सेवा’ देने का दबाव बनाया जा रहा था, उस मामले से जुड़े मुख्य आरोपी के चेहरे का पूरी तरह से खुलासा किया जाए। बीते अक्टूबर महीने में इंडिया गेट पर हुए प्रदर्शन के बाद यह दूसरा मौका है जब पीड़ित परिवार को दिल्ली में हिरासत में लिया गया है। इस घटना के बाद अंकिता के गृह राज्य उत्तराखंड सहित देश भर में न्याय की मांग को लेकर एक बार फिर प्रदर्शन तेज हो गए हैं।