अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़
महिला पत्रकारों से पुलिस हिंसा लोकतंत्र के लिए खतरा: पीसी तिवारी
उपपा संयोजक पीसी तिवारी ने दिल्ली पुलिस पर महिला पत्रकारों से दुर्व्यवहार का आरोप लगाया। उन्होंने निष्पक्ष जांच और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग की।
अल्मोड़ा। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के संयोजक एवं अखिल भारतीय श्रमजीवी महासंघ के पूर्व राष्ट्रीय सचिव पीसी तिवारी ने दिल्ली में महिला पत्रकारों और आंदोलनकारियों के साथ पुलिस दुर्व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा की है। अल्मोड़ा में जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का विरोध कर रहे लोगों की कवरेज कर रही महिला पत्रकारों के साथ दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी विवेक भगत द्वारा कथित यौन हिंसा और मारपीट की गई, जो बेहद चिंताजनक है।
पीसी तिवारी ने कहा कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों का लगातार ह्रास हो रहा है और सवाल पूछने वालों की आवाज दबाई जा रही है। जब देश की राजधानी दिल्ली में ही मीडिया कर्मियों और महिला पत्रकारों की सुरक्षा खतरे में है, तो देश के दूरदराज के इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों में आम नागरिकों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उपापा संयोजक ने सामाजिक-राजनीतिक संगठनों और पत्रकार यूनियनों से एकजुट होकर लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने देश की चुनाव प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल प्रभाव से पद से हटाने और पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। इसके अलावा पीड़िता महिला पत्रकारों की शिकायत दर्ज न करने वाले दोषी पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की गई।
तिवारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार इस संवेदनशील मामले में न्याय देने में जितनी देरी करेगी, जनता और लोकतंत्र प्रेमियों का आक्रोश उतना ही बढ़ता जाएगा। उन्होंने कहा कि नागरिक स्वतंत्रता और प्रेस की आजादी को कुचलने के किसी भी तानाशाही प्रयास का लोकतांत्रिक तरीके से कड़ा विरोध किया जाएगा और आंदोलन को सड़कों तक ले जाया जाएगा।




