मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में हुई बैठक। निजी विश्वविद्यालयों में नर्सिंग कोर्स के मानक तय, 2027-28 तक 500 नर्सेज और वार्ड बॉय को मिलेगा विदेश में रोजगार।
देहरादून। उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में शुक्रवार को एक उच्च अधिकार प्राप्त समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य के निजी विश्वविद्यालयों में नर्सिंग पाठ्यक्रमों के संचालन, मेडिकल मानव संसाधनों की उपलब्धता और युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के अवसरों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान सरकार ने वित्तीय वर्ष 2027-28 तक 500 नर्सेज और वार्ड बॉय को विदेशों में रोजगार उपलब्ध कराने का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है।
बैठक में मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि निजी विश्वविद्यालयों में नर्सिंग पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए निर्धारित सभी शैक्षणिक और आधारभूत मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए। शिक्षा की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, राज्य में मेडिकल मानव संसाधनों की मांग और आपूर्ति के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ का एक व्यवस्थित डेटा बैंक तैयार करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में उत्तराखंड के युवाओं की मांग बढ़ाने के लिए मुख्य सचिव ने पश्चिम एशिया, पश्चिमी यूरोप, एस्टोनिया और खाड़ी देशों में रोजगार की संभावनाओं को तलाशने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विदेशों में रोजगार के इच्छुक युवाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार भाषा दक्षता और अन्य आवश्यक कौशल का प्रशिक्षण दिया जाए, जिससे उन्हें आसानी से बेहतर अवसर मिल सकें।
निजी विश्वविद्यालयों से प्राप्त आवेदनों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक चरण में कुल 73 आवेदन मिले थे, जिनकी स्क्रूटनी के बाद 6 आवेदन समिति के समक्ष रखे गए। इनमें से 5 आवेदनों को नर्सिंग पाठ्यक्रम संचालित करने के योग्य पाया गया, जबकि एक आवेदन पर आगामी बैठक में विचार किया जाएगा। इसके साथ ही अस्पतालों में प्रति बेड के तय मानकों के अनुसार ही नर्सिंग और वार्ड बॉय की तैनाती सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
इस उच्च स्तरीय बैठक में सचिव विनय शंकर, अपर सचिव विजय कुमार जोगदंडे, रोहित मीणा और नवनीत पांडेय सहित कई वरिष्ठ विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। सरकार के इस कदम से न केवल नर्सिंग शिक्षा में सुधार होगा, बल्कि प्रशिक्षित युवाओं के लिए विदेशों में रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे।