अमेरिका के स्टार्टअप मैराथन फ्यूजन का दावा है कि उसने पारे को सोने में बदला है। जानिए न्यूक्लियर फ्यूजन तकनीक की सच्चाई और सोने की कीमतों पर इसका असर।
नई दिल्ली। सोने की आसमान छूती कीमतों के बीच विज्ञान जगत से एक बेहद हैरान करने वाला दावा सामने आया है। अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित स्टार्टअप ‘मैराथन फ्यूजन’ ने पारे को शुद्ध और स्थिर सोने में बदलने का दावा किया है। कंपनी का कहना है कि उसने यह सफलता आधुनिक न्यूक्लियर फ्यूजन तकनीक के जरिए हासिल की है। हालांकि, इस चौंकाने वाले वैज्ञानिक दावे की अभी तक स्वतंत्र रूप से किसी भी संस्था द्वारा पुष्टि नहीं की गई है।
कंपनी के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया ‘न्यूक्लियर ट्रांसम्यूटेशन’ पर आधारित है। इस तकनीक में परमाणु के केंद्रक यानी न्यूक्लियस में बदलाव करके एक तत्व को दूसरे तत्व में बदला जाता है। वैज्ञानिकों ने उच्च-ऊर्जा वाले न्यूट्रॉन को मरकरी-198 के संपर्क में रखा, जिससे मरकरी-197 बना। बाद में यह रेडियोधर्मी आइसोटोप विघटित होकर पूरी तरह से स्थिर गोल्ड-197 में तब्दील हो गया।
मैराथन फ्यूजन ने यह भी बताया कि उनकी सोना बनाने की गति वर्ष 2025 में CERN द्वारा दर्ज किए गए रिकॉर्ड से 10 गुना ज्यादा है। भारत में शुद्ध तरल पारा सामान्यतः ₹10,000 प्रति किलोग्राम की दर से मिलता है, ऐसे में अगर यह तकनीक व्यावहारिक रूप से सफल होती है तो भविष्य में सोने की उपलब्धता पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ेगा। हालांकि, इस परमाणु प्रक्रिया पर आने वाली लागत और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए इसके व्यावसायिक इस्तेमाल पर अभी संशय बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस खोज को अभी बाजार की कीमतों से जोड़कर देखना जल्दबाजी होगी। यदि यह तकनीक सफल भी हो जाती है, तो भी प्रयोगशाला में सोना बनाने का खर्च बहुत अधिक हो सकता है। फिलहाल आम जनता और निवेशकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आने वाले समय में स्वतंत्र जांचकर्ता इस न्यूक्लियर ट्रांसम्यूटेशन दावे की पुष्टि करते हैं या नहीं।