Report by : CWN Desk
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पिथौरागढ़ के अस्कोट में नाबालिग से दुष्कर्म मामले में डीएनए जांच से सच सामने आया। शिक्षक निर्दोष साबित, पुलिस ने आरोपी किशोर को बाल सुधार गृह भेजा

पिथौरागढ़। जिले के अस्कोट क्षेत्र में नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के चर्चित मामले में पुलिस जांच के बाद एक नया और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। जिस शिक्षक पर दुष्कर्म का संगीन आरोप लगा था, वह डीएनए (DNA) जांच की वैज्ञानिक रिपोर्ट के बाद पूरी तरह निर्दोष साबित हुआ है। पुलिस की गहन पड़ताल और फोरेंसिक जांच में यह खुलासा हुआ कि मृत नवजात का जैविक पिता गांव का ही एक नाबालिग किशोर था।
पुलिस से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मामले में 24 जुलाई को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष और सटीक बनाने के लिए मृत शिशु और आरोपी बनाए गए शिक्षक के डीएनए नमूनों को परीक्षण के लिए क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला, रुद्रपुर भेजा गया था। प्रयोगशाला से आई रिपोर्ट में शिक्षक का डीएनए मैच नहीं हुआ, जिससे शिक्षक पर लगे झूठे आरोपों का पर्दाफाश हो गया।
डीएनए रिपोर्ट में अंतर आने के बाद पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाई और दो अन्य संदिग्धों के रक्त के नमूने 12 अक्तूबर को दोबारा परीक्षण के लिए रुद्रपुर प्रयोगशाला भेजे। हाल ही में प्राप्त हुई रिपोर्ट में एक नमूने का डीएनए पूरी तरह से मैच हो गया। जांच में यह रिपोर्ट गांव के ही एक नाबालिग किशोर की निकली, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए किशोर को हिरासत में ले लिया।
मामले का पूरा सच उजागर होने के बाद पुलिस ने आरोपी किशोर को राजकीय बाल संप्रेक्षण गृह, अल्मोड़ा भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर की गई इस जांच से निर्दोष व्यक्ति को न्याय मिला है। इस घटना के बाद से क्षेत्र में पुलिस की निष्पक्ष कार्यप्रणाली की सराहना की जा रही है, वहीं झूठे आरोपों से मुक्त होने पर शिक्षक और उनके परिवार ने राहत की सांस ली है।

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