Report by : CWN Desk
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उत्तराखंड के चमोली में पीरियड्स की पुरानी कुरीति के कारण 19 वर्षीय सावित्री को जान गंवानी पड़ी। जानिए कैसे अंधविश्वास ने एक और मासूम की सांसें छीन लीं।

चमोली। जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। नंदानगर क्षेत्र के सुतोल गांव की 19 वर्षीय सावित्री की जान एक हादसे में चली गई। हालांकि यह मौत सिर्फ एक दुर्घटना नहीं है। इसके पीछे समाज में गहराई तक फैली मासिक धर्म से जुड़ी अंधविश्वासी कुरीतियां हैं।
गांव में प्रचलित धार्मिक मान्यताओं के कारण पीरियड्स के दौरान महिलाओं को घर पर नहाने और कपड़े धोने की सख्त मनाही है। इस कारण सावित्री को गांव से दूर बहने वाली उफनती नदी पर जाना पड़ा। 15 अगस्त को जब पूरा देश आजादी का पर्व मना रहा था, तब सावित्री नदी के तेज बहाव में बह गई।
इस दुखद घटना ने परिवार, समाज और स्थानीय प्रशासन के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब दुनिया तकनीक और अंतरिक्ष के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है, तब भी हमारे समाज में महिलाओं के एक प्राकृतिक जैविक बदलाव को अशुद्धता से जोड़ा जा रहा है। यह लापरवाही और रूढ़िवादी सोच एक मासूम की हत्या के समान है।
यह मामला हमारी शिक्षा व्यवस्था की सीमाओं को भी उजागर करता है। जब तक स्कूलों और घरों में मासिक धर्म की वैज्ञानिक समझ विकसित नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं रुकना मुश्किल है। आज समाज को अपनी रूढ़िवादी मानसिकता से बाहर निकलकर अपनी बेटियों की सुरक्षा को पहली प्राथमिकता बनानी होगी।

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