इतिहासकार और शिक्षाविद् कामरेड डॉ. गिरिधर पंडित के निधन पर उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने गहरा शोक व्यक्त किया। जानिए उनके जीवन और संघर्ष की पूरी कहानी।
अल्मोड़ा। प्रख्यात विद्वान, इतिहासकार, शिक्षाविद् और जनांदोलनों के समर्पित साथी कामरेड डॉ. गिरिधर पंडित के निधन से पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई है। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने उनके देहावसान पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। पार्टी के नेताओं ने कहा कि उनका जाना उत्तराखंड के बौद्धिक, सामाजिक और राजनीतिक जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के संयोजक पी. सी. तिवारी ने डॉ. पंडित के साथ अपने दशकों पुराने संबंधों को याद किया। उन्होंने बताया कि अल्मोड़ा कॉलेज में पढ़ाई के दिनों से ही डॉ. पंडित एक प्रखर छात्र नेता और शोधार्थी के रूप में युवाओं को जनसंघर्षों से जोड़ते थे। उन्होंने युवाओं को श्रीदेव सुमन और कामरेड नागेंद्र सकलानी जैसे महान क्रांतिकारियों के संघर्षों से परिचित कराया था।
वन आंदोलन से लेकर पृथक उत्तराखंड राज्य आंदोलन तक डॉ. पंडित सदैव अग्रणी भूमिका में रहे। नैनीताल जेल में आंदोलनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में उन्हें टिहरी से गिरफ्तार भी किया गया था। वे 1969 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े और जीवन भर वामपंथी व जनपक्षधर विचारों के साथ सांप्रदायिकता और सामाजिक अन्याय के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाते रहे।
डॉ. पंडित ने टिहरी रियासत की निरंकुश राजशाही के खिलाफ हुए ऐतिहासिक जनविद्रोह पर गहरा और प्रामाणिक शोध कार्य किया। वर्ष 2023 में उनकी ऐतिहासिक पुस्तक का प्रकाशन भी हुआ था। इसके अतिरिक्त, देवप्रयाग महाविद्यालय की स्थापना और संचालन में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने उनके शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है।