Report by : CWN Desk
Published at :
नगरखान में पर्वतीय कृषि रक्षा समिति की बैठक: बाहरी लोगों द्वारा जमीन खरीदने पर रोक लगाने की मांग

अल्मोड़ा के नगरखान में पर्वतीय कृषि रक्षा समिति की बैठक में खेत बचाओ अभियान के तहत तारबाड़, झाड़ियां हटाने और बाहरी लोगों द्वारा कृषि भूमि खरीदने पर रोक लगाने की मांग उठी।

अल्मोड़ा। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के अंतर्गत आने वाले नगरखान क्षेत्र में आज पर्वतीय कृषि रक्षा समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में क्षेत्र के विकास और काश्तकारों की आजीविका को लेकर कई गंभीर मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में उपस्थित किसानों और समिति के सदस्यों ने सरकार के ‘खेत बचाओ अभियान’ का पुरजोर स्वागत किया। इसके साथ ही, उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों में दम तोड़ती खेती को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार से ठोस और त्वरित कदम उठाने की पुरजोर वकालत की।


बैठक के दौरान समिति के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को संबोधित मांगों को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया। किसानों ने मांग की है कि खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत खेती योग्य भूमि की सुरक्षा के लिए तत्काल तारबाड़ हेतु बजट आवंटित किया जाए। इसके अलावा, गांवों और खेतों के बीच तेजी से उग आई कुरी और अन्य हानिकारक झाड़ियों को साफ करने के लिए भी विशेष धन आवंटन की आवश्यकता जताई गई। समिति ने साफ कहा कि जंगली जानवरों और खरपतवार के कारण पहाड़ों में खेती लगातार बंजर होती जा रही है।
इस बैठक में सबसे गंभीर चिंता पर्वतीय क्षेत्रों में बाहरी लोगों द्वारा कृषि भूमि की अंधाधुंध खरीद और जमीनों को लीज पर दिए जाने को लेकर प्रकट की गई। वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता ब्रह्मा नन्द डालाकोटी और अन्य सदस्यों ने इस प्रवृत्ति पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर पहाड़ों में कृषि भूमि को बाहरी खरीदारों से नहीं बचाया गया, तो स्थानीय मूल निवासियों के सामने भविष्य में अस्तित्व का संकट खड़ा हो जाएगा। बैठक में शिक्षा और बुनियादी ढांचे का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। सदस्यों ने राजकीय इंटर कालेज नगरखान के भवन निर्माण की मांग करते हुए गहरी नाराजगी जताई कि स्थापना के 40 वर्ष बीत जाने के बाद भी यह एकमात्र ऐसा विद्यालय है जो आज तक भवनहीन है। इसके अलावा मनिआगर-नगरखान सड़क की खस्ताहालत को सुधारने और पेयजल की समस्या के समाधान के लिए हैंडपंप लगाने की मांग की गई।
समिति ने गर्मियों के सीजन को देखते हुए जंगलों की सुरक्षा के लिए लीसा गड़ान पद्धति में तुरंत बदलाव करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने वनों को दावानल (आग) से बचाने के लिए फायर लाइन काटने और निरंतर निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने का प्रस्ताव रखा। बैठक के अंत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इन सभी जायज मांगों और पूर्व में भेजे गए ज्ञापनों पर कार्यवाही सुनिश्चित कराने के लिए अगले सप्ताह समिति का एक शिष्टमंडल जिलाधिकारी अल्मोड़ा से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपेगा।

Follow CWN TODAY on WhatsAppJoin ›