अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़
जागेश्वर में 10 साल से अधूरी सड़कों के डामरीकरण के लिए ग्रामीणों ने सरकार से लगाई गुहार
जागेश्वर के भगरतोला-चमुवा और सिघोला मार्ग पर 10 साल से डामरीकरण न होने से ग्रामीणों में रोष है। स्वतंत्रता सेनानी परिवार संग ग्रामीणों ने सीएम से गुहार लगाई।
अल्मोड़ा। जिले की जागेश्वर विधानसभा क्षेत्र में ग्रामीण बुनियादी ढांचे की बदहाली का मामला गहराता जा रहा है। क्षेत्र के भगरतोला, कदौरी, चमुवा, खेतीगैर और कबकोली गांवों को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पिछले 10 वर्षों से डामरीकरण की राह देख रही है। वर्ष 2016 में आरआईडीएफ (RIDF) योजना के तहत शुरू हुई यह सड़क आज भी कच्ची स्थिति में पड़ी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में दर्जनों गांवों की आबादी नित्य मुश्किलों का सामना करने को मजबूर है।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय बद्री दत्त पांडे जी के वंशज और वरिष्ठ नागरिक बी. सी. पांडे के नेतृत्व में समस्त ग्रामवासियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा और जागेश्वर विधायक मोहन सिंह मेहरा को प्रार्थना पत्र भेजा है। ग्रामीणों ने ज्ञापन के माध्यम से जागेश्वर में शिवा रेस्टोरेंट से लेकर भगरतोला-कदौरी-चमुवा-खेतीगैर-कबकोली तक के पूरे मार्ग पर त्वरित डामरीकरण कराने की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से अधूरी पड़ी यह सड़क क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।
इसके साथ ही सिघोला से मतदान केंद्र चमुवा प्राइमरी स्कूल तक जाने वाले हाल ही में शुरू किए गए मार्ग का कार्य भी बीच में ही रुक गया है। मतदान केंद्र और प्राथमिक विद्यालय जाने वाले इस रास्ते के अधूरे पड़े होने से स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। डामरीकरण न होने के कारण हल्की बारिश में भी सड़क पर कीचड़ जमा हो जाता है, जिससे दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार जल्द ही दोनों महत्वपूर्ण सड़कों पर पक्का डामरीकरण कार्य प्रारंभ नहीं कराती है, तो क्षेत्रवासी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। जन-प्रतिनिधियों और लोनिवि प्रशासन से गुहार लगाते हुए ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि धामी सरकार इस गंभीर जन-समस्या का शीघ्र अति शीघ्र समाधान निकालेगी। सड़क का निर्माण पूरा होने से जागेश्वर धाम के आसपास के दर्जनों दूरस्थ गांवों की आवाजाही सुगम हो जाएगी।
