Report by : CWN Desk
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हरीश रावत का बड़ा कबूलनामा, खुद को बताया ‘उज्याडू बल्द’, सियासी हलचल तेज!

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर आत्ममंथन करते हुए खुद को ‘उज्याडू बल्द’ कहा। जानें 2012 के किस फैसले पर उन्हें आज पछतावा हो रहा है।

हल्द्वानी। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत एक बार फिर अपने बयानों के कारण सुर्खियों में हैं। रावत ने सोशल मीडिया पर आत्ममंथन करते हुए एक लंबी पोस्ट साझा की है। इस पोस्ट में उन्होंने अपने पुराने राजनीतिक फैसलों पर सवाल उठाए हैं। सबसे ज्यादा चर्चा उनके द्वारा खुद को “उज्याडू बल्द” (फसल बर्बाद करने वाला बैल) कहने पर हो रही है। उनके इस अनूठे अंदाज ने राज्य की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।

हरीश रावत का बड़ा कबूलनामा, खुद को बताया ‘उज्याडू बल्द’, सियासी हलचल तेज!


हरीश रावत ने अपनी पोस्ट में साल 2012 के घटनाक्रम का विशेष रूप से जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि उस समय मंत्रिमंडल गठन के दौरान उन्होंने एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला था। रावत के अनुसार, पिथौरागढ़ के विधायक मयूख महर को कैबिनेट में शामिल किया जाना तय था। हालांकि, रावत ने नेतृत्व से आग्रह कर मयूख महर की जगह दिनेश अग्रवाल को मंत्री बनवाया था। अब रावत को लगता है कि उस फैसले ने पार्टी के भीतर असंतुलन पैदा किया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि उनके उस आग्रह के दूरगामी परिणाम पार्टी के लिए सुखद नहीं रहे। उन्होंने दिनेश अग्रवाल के कांग्रेस छोड़ने पर भी दुख व्यक्त किया है। रावत ने लिखा कि उनके इस फैसले से पिथौरागढ़ में कांग्रेस के सांगठनिक ढांचे को नुकसान पहुंचा। इसी संदर्भ में उन्होंने दिनेश अग्रवाल द्वारा प्रयुक्त शब्द “उज्याडू बल्द” को आंशिक रूप से खुद पर स्वीकार किया। रावत का यह ईमानदार कबूलनामा उनके समर्थकों और विरोधियों दोनों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
उत्तराखंड की राजनीति में हरीश रावत हमेशा से अपने प्रतीकात्मक और मुहावरेदार भाषा के लिए जाने जाते हैं। इस बार भी उन्होंने “समझ सको तो समझ लो” वाले अंदाज में अपनी गलतियां स्वीकार की हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पोस्ट आगामी चुनावों से पहले डैमेज कंट्रोल की एक कोशिश हो सकती है। फिलहाल, रावत के इस आत्ममंथन ने कांग्रेस के भीतर पुराने घावों को एक बार फिर हरा कर दिया है।

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