उत्तराखंड के कोटद्वार में सीबीआई और आरबीआई के नाम पर रिटायर्ड कर्मचारी से 30 लाख रुपये की ठगी। जानें डिजिटल अरेस्ट स्कैम से बचने के जरूरी उपाय।
कोटद्वार। साइबर ठगों ने एक हैरान करने वाला मामला अंजाम दिया है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी भगत सिंह रावत को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 30 लाख रुपये ठग लिए गए। ठगों ने उन्हें सात साल की जेल और एक करोड़ रुपये जुर्माने का खौफ दिखाया था। पीड़ित ने इस मामले में साइबर अपराध देहरादून थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
घटना की शुरुआत चार अक्तूबर को हुई जब पीड़ित के पास एक फर्जी कॉल आई। फोन करने वाले ने दावा किया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और आपराधिक गतिविधियों में हो रहा है। इसके बाद खुद को सीबीआई और आरबीआई का अधिकारी बताने वाले ठगों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उन्हें डराया। डर के माहौल में आकर पीड़ित ने सात अक्तूबर को आरटीजीएस के जरिए 30 लाख रुपये ठगों के बताए खाते में ट्रांसफर कर दिए।
जब ठगों ने यस बैंक के दूसरे खातों में और रकम भेजने का दबाव बनाया, तब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ। आरोपियों ने डराने के लिए व्हाट्सएप पर ईडी का फर्जी अरेस्ट वारंट भी भेजा था। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले में तुरंत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई व्यवस्था देश के कानून में नहीं है। यदि आपके पास भी ऐसा कोई संदिग्ध फोन आता है, तो तुरंत घबराएं नहीं। तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या आधिकारिक वेबसाइट पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। सतर्कता ही इस तरह के फ्रॉड से बचने का सबसे बड़ा उपाय है।
