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नैनीताल। उत्तराखंड की सड़कों पर ओवरस्पीड के कारण हो रही दुर्घटनाएं रोकने के लिए सेंसर और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। यह जानकारी गुरुवार को हाईकोर्ट में उत्तराखंड के ट्रैफिक डायरेक्टर आईजी अरुण मोहन जोशी ने दी। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंदर एवं न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की खंडपीठ ने राज्य में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए और क्या बेहतर किया जा सकता है? इस विषय पर आईजी ट्रैफिक से छह सप्ताह के भीतर सुझाव प्रस्तुत करने के लिए कहा है।
हाईकोर्ट के अधिवक्ता ललित मिगलानी ने इस संबंध में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि राज्य में आए दिन 18 से 25 साल उम्र के नौजवानों की ओवरस्पीड में वाहन चलाने से सड़क हादसों में मौत हो रही है। पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने ट्रैफिक डायरेक्टर को अदालत में पेश होने के लिए कहा था। जिस पर गुरुवार को प्रदेश के ट्रैफिक डायरेक्टर आईजी अरुण मोहन जोशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि ओवरस्पीड पर अंकुश लगाने के लिए यातायात पुलिस कार्य कर रही है। इस मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल को होगी।
दून और चारधाम मार्ग से होगी सेंसर लगाने की शुरुआत
ओवरस्पीड रोकने को सड़कों पर सेंसर लगाने की शुरुआत देहरादून से होगी। आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में ट्रैफिक डायरेक्टर आईजी अरुण मोहन जोशी ने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस योजना पर पहले दून फिर चारधाम यात्रा मार्ग पर कार्य होगा। हाईकोर्ट ने ओवरस्पीडिंग पर अंकुश के लिए मैनुअली की जगह तकनीक का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने योजना की सराहना की है।