उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने का प्रस्ताव REC ने फिर खारिज कर दिया है। 30 हेक्टेयर वन भूमि और वैकल्पिक स्थल न तलाशने के कारण यह फैसला लिया गया।
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी में स्थानांतरित करने की योजना को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। क्षेत्रीय सशक्त समिति (Regional Empowered Committee – REC) की बैठक में तराई केंद्रीय वन प्रभाग के तहत लामाचौड़ ब्लॉक में 30 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि के डायवर्जन प्रस्ताव को खारिज (REJECT) कर दिया गया है। समिति ने इस प्रस्ताव को ‘नॉन-साइट-स्पेसिफिक’ मानते हुए कहा कि गैर-वन भूमि के विकल्पों को पर्याप्त रूप से नहीं तलाशा गया।
नैनीताल हाईकोर्ट में मुकदमों की संख्या वर्ष 2010 के 4,000 से बढ़कर अब 64,000 से अधिक हो गई है। जगह की भारी कमी, ट्रैफिक जाम और वादियों के लिए बढ़ते खर्च को देखते हुए हल्द्वानी में G+7 मंजिला आधुनिक हाईकोर्ट परिसर बनाने का प्रस्ताव लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा तैयार किया गया था। इस प्रोजेक्ट के लिए 123 पेड़ों का पातन प्रस्तावित था और नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) के तहत 3.68 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था।
प्रस्ताव के मूल्यांकन के दौरान REC ने कई अहम सवाल उठाए और कमियां उजागर कीं। समिति ने कहा कि जब प्रतिपूरक वनीकरण (CA) के लिए गैर-वन भूमि उपलब्ध है, तो हाईकोर्ट परिसर के निर्माण के लिए उपयुक्त गैर-वन भूमि की संभावनाओं को पूरी तरह से एक्सप्लोर क्यों नहीं किया गया। इसके अतिरिक्त, वन्यजीव प्रबंधन योजना, विस्तृत लेआउट प्लान और HoFF की संस्तुति जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों का अभाव भी इस खारिज होने की वजह बना।
इससे पूर्व भी गौलापार, हल्द्वानी में तैयार किया गया पिछला प्रस्ताव 24 जनवरी 2024 को REC द्वारा खारिज किया जा चुका है। REC के इस ताजा फैसले के बाद अब राज्य सरकार और यूजर एजेंसी को निर्देश दिया गया है कि वे किसी उपयुक्त गैर-वन भूमि पर ही इस प्रोजेक्ट को स्थापित करने के विकल्पों पर दोबारा विचार करें। इस फैसले के बाद हाईकोर्ट के हल्द्वानी स्थानांतरण की प्रक्रिया पर फिलहाल विराम लग गया है।