हल्द्वानी। नवनियुक्त आईजी कुमाऊं रिधिम अग्रवाल ने पदभार ग्रहण करने के बाद पहली बार प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि अपराध पर लगाम लगाने के लिए केवल दफ्तर में बैठकर निर्देश देना काफी नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों को भी फील्ड में उतरना होगा, ताकि जनता को सुरक्षित माहौल मिल सके। गुरुवार को कैंप कार्यालय में पदभार ग्रहण करने के बाद आईजी ने कहा कि अपराध रोकने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों के साथ-साथ अफसरों को भी सक्रिय रहना होगा।

अफसर दफ्तर में बैठने की आदत छोड़ें
आईजी रिधिम अग्रवाल ने कहा कि अपराध नियंत्रण पुलिस की पहली जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अधिकारी दफ्तरों में बैठकर आराम करने की आदत छोड़ें और फील्ड में सक्रिय होकर अपराधियों पर लगाम लगाएं। आईजी ने कुमाऊं में यातायात को सुगम बनाने के लिए अफसरों को योजनाओं पर काम करने के निर्देश भी दिए। इसके अलावा अर्धसैनिक बलों और सीमा से सटे राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करने की बात कही।
साइबर अपराध को बताया बड़ी चुनौती
आईजी ने कहा कि आधुनिक दौर में साइबर अपराध सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। इसे रोकने के लिए पुलिस को स्वयं जागरूक होना होगा और साइबर अपराधियों पर नजर रखनी होगी। इस संबंध में पुलिस कर्मियों को तकनीकी प्रशिक्षण और संसाधन मुहैया कराए जाएंगे।
महिला उत्पीड़न मामलों की सुनवाई में पुरुष अफसर भी करेंगे जांच
आईजी रिधिम अग्रवाल ने कहा कि अब तक महिला उत्पीड़न के मामले अधिकांश रूप से महिला दारोगाओं द्वारा ही देखे जाते हैं। लेकिन अब निर्देश दिए जाएंगे कि महिला उत्पीड़न मामलों की प्रारंभिक जांच पुरुष दारोगा भी कर सकते हैं। इससे महिलाओं की समस्याओं का त्वरित निस्तारण किया जा सकेगा।
पुलिसकर्मियों की बीट का डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा सुरक्षित
आईजी ने कहा कि अब कुमाऊं के सभी जिलों में पुलिसकर्मियों की बीट का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा। इसके लिए ई-बीट ऐप का उपयोग किया जाएगा, जिसमें संबंधित पुलिसकर्मी अपनी बीट क्षेत्र की आपराधिक गतिविधियों, हिस्ट्रीशीटरों और अन्य आरोपियों का डेटा दर्ज करेंगे। सिपाही का तबादला होने के बाद भी इस ऐप में पुराना रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा, जिससे अपराधियों की निगरानी करना आसान होगा।
ई-बीट ऐप से आसान होगी निगरानी
आईजी ने बताया कि ई-बीट बुक ऐप पर कुमाऊं के सभी छह जिलों के पुलिसकर्मी अपनी बीट क्षेत्र की पुरानी आपराधिक गतिविधियों, हत्या, दुष्कर्म, चोरी-डकैती समेत अन्य मामलों में नामजद आरोपियों का रिकॉर्ड रखेंगे। इससे थाना-चौकी के सिपाही अपने क्षेत्र में जाकर संदिग्धों और अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रख सकेंगे। इस ऐप में दर्ज डेटा के जरिए पुलिस को अपराधियों की गतिविधियों की निगरानी में आसानी होगी और कानून व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा सकेगा।
जिलों के कप्तानों के साथ बैठक करेंगी आईजी
आईजी रिधिम अग्रवाल ने कहा कि शुक्रवार को सभी जिलों के कप्तानों के साथ बैठक कर अपराध नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और साइबर अपराध रोकने की योजनाओं पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि पुलिसिंग को और प्रभावी बनाने के लिए तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल किया जाएगा।
