Report by : CWN Desk
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पौड़ी: घास काट रही महिला पर भालू का हमला, चेहरा नोचा; गांव में दहशत, AIIMS दिल्ली ले गए परिजन

उत्तराखंड में भालू के हमले में घायल लोगों के मुआवजे को 3 लाख से बढ़ाकर 10 लाख कर दिया गया है। वन विभाग ने ‘बियर स्प्रे’ और नई टीमें तैनात करने जैसे कई अहम फैसले लिए हैं। जानें सभी महत्वपूर्ण बदलाव।

देहरादून। उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष (Wildlife Conflict) लगातार बढ़ता जा रहा है, खासकर भालू के हमले (Bear Attack) की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए वन विभाग ने अब कई बड़े और ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। प्रमुख मुख्य वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह तय किया गया है कि भालू के हमले में गंभीर रूप से घायल होने वाले व्यक्ति को इलाज के लिए मिलने वाली सहायता राशि को तीन लाख रुपये से बढ़ाकर सीधा दस लाख रुपये कर दिया जाएगा।
₹10 लाख तक की मदद, आयुष्मान कार्डधारकों को भी लाभ
यह निर्णय राज्य के निवासियों के लिए एक बड़ी राहत है। अब तक गंभीर रूप से घायल को ₹3 लाख मिलते थे।  यह सहायता अब ₹10 लाख कर दी गई है। सबसे अहम बात यह है कि जिन लोगों के पास आयुष्मान कार्ड है, उन्हें भी अब इलाज के लिए यह पैसा मिलेगा, जिससे किसी भी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को इलाज से वंचित नहीं होना पड़ेगा। इस संबंध में वन विभाग ने प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया है।
भालुओं को भगाने के लिए ‘बियर स्प्रे’ और अतिरिक्त टीमें
वन विभाग ने भालू हमला प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए कई नई रणनीतियाँ बनाई हैं। सबसे पहले, रुद्रप्रयाग समेत अन्य प्रभावित गाँवों में अतिरिक्त टीमें तैनात की जाएंगी। इन टीमों का मुख्य काम झाड़ियों का कटान, स्कूलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और रात में गश्त करना होगा। एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है कि भालुओं को सुरक्षित रूप से भगाने के लिए ‘बियर स्प्रे’ खरीदे जाएंगे। यह शिमला मिर्च से बना एक ऐसा स्प्रे होता है जो भालुओं की आँखों में हल्की जलन पैदा करता है, जिससे वे बिना घायल हुए दूर भाग जाते हैं।
प्रभावित क्षेत्रों में समय परिवर्तन और सख्त गश्त के निर्देश
बैठक में कुछ तत्काल और कड़े निर्देश भी दिए गए हैं। रुद्रप्रयाग जिले में भालू की आवाजाही को देखते हुए स्कूलों के समय को एक घंटा आगे बढ़ाया जाएगा। वनकर्मियों को निर्देश दिया गया है कि वे क्षेत्र में नियमित गश्त करें और गाँवों में ही रात में रुकें ताकि स्थानीय लोगों में सुरक्षा की भावना बनी रहे। इसके अलावा, फील्ड कर्मियों की अतिरिक्त तैनाती की जाएगी और आवश्यक उपकरण जैसे फॉक्स लाइट, बुश कटर और सोलर लाइट खरीदे जाएंगे। खुले कूड़े का सही निस्तारण करने के लिए जिलाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा, क्योंकि खुला कूड़ा वन्यजीवों को आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आकर्षित करता है।

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