उत्तर प्रदेश
मुरादाबाद पीएम श्री स्कूल फर्नीचर घोटाला: लोकायुक्त ने स्वीकार की शिकायत
मुरादाबाद के PM Shri स्कूलों में फर्नीचर खरीद में अनियमितता का मामला लोकायुक्त उत्तर प्रदेश पहुंचा। तत्कालीन बीएसए पर जांच की प्रक्रिया शुरू।
अभिषेक गौड़
मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में स्थित पीएम श्री (PM Shri) स्कूलों में फर्नीचर खरीद के दौरान हुई अनियमितताओं का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सेंट्रल पर्चेजिंग और खरीद प्रक्रिया में बरती गई कथित धांधली की शिकायत अब माननीय लोकायुक्त, उत्तर प्रदेश के कार्यालय पहुंच गई है। लोकायुक्त कार्यालय ने मामले की प्राथमिक समीक्षा के बाद शिकायतकर्ता को पत्र जारी कर प्रकरण को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है।

लोकायुक्त कार्यालय लखनऊ द्वारा जारी पत्र में शिकायतकर्ता को निर्देश दिए गए हैं कि वे जल्द से जल्द नोटरी का शपथ पत्र और परिवाद दर्ज कराने के लिए निर्धारित शुल्क जमा करें। इस शिकायत में मुरादाबाद के तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) विमलेश कुमार और उनके कार्यालय के सहयोगियों को मुख्य रूप से नामजद किया गया है। आरोप है कि फर्नीचर खरीद की प्रक्रिया में तय नियमों और मानकों को पूरी तरह दरकिनार किया गया।
केवल जिला स्तर ही नहीं, बल्कि विभिन्न स्कूलों के स्तर पर भी फर्नीचर क्रय में बरती गई लापरवाहियों और वित्तीय अनियमितताओं को लोकायुक्त के समक्ष प्रस्तुत शिकायत में शामिल किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि केंद्रीय खरीद व्यवस्था का गलत इस्तेमाल करके सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। लोकायुक्त कार्यालय से मिले निर्देशों के अनुसार जल्द ही सभी आवश्यक साक्ष्य और निर्धारित शुल्क जमा कराकर सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी।
पीएम श्री योजना केंद्र सरकार की एक अति-महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य सरकारी विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं से लैस मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करना है। ऐसे में मुरादाबाद के स्कूलों में फर्नीचर खरीद के नाम पर सामने आई धांधली ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में लोकायुक्त की सक्रियता के बाद बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों में हड़कंप का माहौल है।
प्रकरण की आधिकारिक जांच शुरू होने से अब निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है। यदि लोकायुक्त की जांच में आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कानूनी और अनुशासनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। क्षेत्र के लोगों की नजरें अब लोकायुक्त कार्यालय की आगामी कार्रवाई और इस पूरे मामले में आने वाले मोड़ पर टिकी हुई हैं।
