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कैलास मानसरोवर यात्रा आत्मा का परमात्मा से मिलन: सीएम धामी ने पहले दल को दिखाई हरी झंडी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने टनकपुर से कैलास मानसरोवर यात्रा के 51 सदस्यीय पहले दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यात्रियों को सुरक्षित रहने के दिए निर्देश।
टनकपुर। देवभूमि उत्तराखंड से आस्था और अध्यात्म की सबसे बड़ी और पवित्रतम यात्राओं में से एक का भव्य शिलान्यास हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को टनकपुर स्थित टीआरसी (TRC) परिसर से कैलास मानसरोवर यात्रा के 51 सदस्यीय प्रथम दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी यात्रियों का पारंपरिक रूप से स्वागत और अभिनंदन किया। उन्होंने भगवान शिव से सभी दर्शनार्थियों की सुरक्षित और सुखद यात्रा के लिए विशेष मंगलकामना की।
यात्रियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह कोई साधारण यात्रा नहीं है, बल्कि यह आत्मा का परमात्मा से मिलने की एक अद्भुत आध्यात्मिक यात्रा है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ की आबादी वाले इस देश में से इस दल के भाग्यशाली लोगों को बाबा कैलास के दर्शन का अवसर मिला है, जो साक्षात भोलेनाथ का आशीर्वाद है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि पहले दल को रवाना करना उनके लिए केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि भगवान के चरणों में नतमस्तक होने का सौभाग्य है।
मुख्यमंत्री ने यात्रा की भौगोलिक कठिनाइयों का जिक्र करते हुए सभी यात्रियों से बेहद सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जारी की गई एसओपी (SOP) का सभी यात्री पूरी तरह से पालन करें और हमेशा समूह में ही आगे बढ़ें। सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अब सीमांत गांवों को भारत के पहले गांव के रूप में नई पहचान मिली है। इन गांवों से गुजरते हुए यात्रियों को स्थानीय संस्कृति, रहन-सहन और पौराणिक चीजों को करीब से जानने का मौका मिलेगा।
आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने यात्रियों से अपील की कि वे अपनी यात्रा के कुल बजट का 5 से 10 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय पहाड़ी उत्पादों को खरीदने पर खर्च करें। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार इस यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए पूरी तरह समर्पित है। राज्य में सनातन संस्कृति के संरक्षण और इतिहास के गहन अध्ययन के लिए देहरादून में ‘सेंटर फॉर हिंदू एक्सीलेंस’ की स्थापना भी की जा रही है। अंत में सीएम ने हर-हर महादेव के जयघोष के साथ दल को विदा किया।
