हरिद्वार
आरटीआई में सूचना छिपाना पड़ा भारी, सूचना आयोग ने एचआरडीए अधिकारी पर ठोका जुर्माना
हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) में ड्रोन टेंडर घोटाले की सूचना छिपाने पर राज्य सूचना आयोग ने सहायक अभियंता प्रशांत कुमार सेमवाल पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया है।
हरिद्वार: उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर हर की पौड़ी पर आयोजित ड्रोन लाइट शो और विकास कार्यों की निगरानी के लिए खरीदे गए ड्रोन्स के संचालन में बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। इस टेंडर आवंटन घोटाले से जुड़ी आरटीआई (RTI) सूचना छिपाने के मामले में राज्य सूचना आयोग ने कड़ी कार्रवाई की है। आयोग ने हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) के सहायक अभियंता प्रशांत कुमार सेमवाल को दोषी पाते हुए उन पर दस हजार रुपये का भारी जुर्माना लगाया है।
राष्ट्रीय सूचना अधिकार जागृति मिशन के अध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा ने जून 2025 में एचआरडीए कार्यालय में आवेदन देकर 4 बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। उन्होंने जानना चाहा था कि हर की पौड़ी पर ड्रोन शो का अनुबंध किस कंपनी को दिया गया था। इसके साथ ही उन्होंने गंगा घाटों पर लगी फसाद लाइटों और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी के लिए खरीदे गए ड्रोन उपकरणों की संख्या और तकनीकी कर्मियों की नियुक्ति की जानकारी भी मांगी थी।
इस मामले में शुरुआत से ही विभाग के अधिकारियों द्वारा टालमटोल का रवैया अपनाया गया। प्रथम लोक सूचना अधिकारी श्रीमती वर्षा ने सूचनाओं को बहुत बड़ा बताकर माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए जानकारी देने से मना कर दिया था। इसके बाद जब अपील विभागीय सचिव मनीष कुमार सिंह के पास पहुंची, तो उन्होंने भी सूचना रोकने के प्रतिबंध को सही ठहरा दिया था। इसके खिलाफ आवेदक ने सूचना आयोग में द्वितीय अपील दर्ज कराई।
सूचना आयुक्त दिलीप सिंह कुंवर ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई की। आयोग ने सूचना देने में 9 महीने का विलंब करने और आदेश की अवहेलना करने पर सहायक अभियंता प्रशांत कुमार सेमवाल को सख्त फटकार लगाई। पहले सूचना को बहुत विस्तृत बताना और बाद में ‘सूचना उपलब्ध नहीं है’ का झूठा बहाना बनाने पर आयोग ने सख्त रुख अपनाया। इसके बाद आरटीआई अधिनियम की धारा 20(1) के तहत अधिकारी पर 23 जून 2026 को जुर्माना आरोपित कर दिया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि सूचना आयोग की यह कड़ी कार्रवाई भ्रष्टाचार को दबाने वाले अधिकारियों के लिए एक बड़ा सबक है। आयोग के आदेशानुसार, दोषी अधिकारी के वेतन से जुर्माने की यह राशि तीन महीने के भीतर दो समान किश्तों में वसूल कर सरकारी राजकोष में जमा कराई जाएगी। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब एचआरडीए के टेंडर आवंटन और ड्रोन संचालन में हुई गड़बड़ियों की फाइलें सार्वजनिक होना तय माना जा रहा है।
