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उत्तराखण्ड

मणिपुर उग्रवादी हमले में उत्तराखंड के दो लाल शहीद, सीएम धामी ने दी श्रद्धांजलि

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मणिपुर के उखरूल में असम राइफल्स के काफिले पर हुए उग्रवादी हमले में उत्तराखंड के हवलदार चंद्रमोहन सिंह और वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह ने सर्वोच्च बलिदान दिया है।

इंफाल/देहरादून: मणिपुर के उखरूल जिले में असम राइफल्स के काफिले पर उग्रवादियों द्वारा घात लगाकर किए गए कायरतापूर्ण हमले में उत्तराखंड के दो जांबाज जवानों ने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया है। इस आतंकी हमले में शहीद होने वाले हवलदार चंद्रमोहन सिंह रावत और वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह दोनों ही देवभूमि उत्तराखंड के रहने वाले थे। मंगलवार को असम राइफल्स के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेड़ा ने दोनों वीर सपूतों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
सोमवार को नगा-बहुल उखरूल जिले में उग्रवादियों ने असम राइफल्स के गश्ती दल को निशाना बनाकर अचानक अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी थी। इस भीषण हमले में दोनों जवानों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए मुकाबला किया और वीरगति को प्राप्त हुए। शहीद हवलदार चंद्रमोहन सिंह उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल स्थित डांडातोली क्षेत्र के कुकलियाल गांव के मूल निवासी थे, जबकि वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह भी गढ़वाल क्षेत्र के रहने वाले थे।
शहीद हवलदार चंद्रमोहन सिंह रावत का परिवार वर्तमान में गाजियाबाद में रहता है। उनके परिवार में पत्नी मंजू देवी, दो बेटियां और एक बेटा है। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, चंद्रमोहन सिंह हाल ही में छुट्टी बिताकर घर से वापस लौटे थे। वह बीती 3 जुलाई को ही गाजियाबाद से वापस ड्यूटी पर तैनात हुए थे और इसके महज तीन दिन बाद ही उनके शहीद होने की दुखद खबर आ गई। इस घटना के बाद से शहीद के पैतृक गांव और गाजियाबाद स्थित आवास पर कोहराम मचा हुआ है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोनों वीर जवानों की शहादत पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा और अखंडता के लिए दिया गया इन वीर सपूतों का सर्वोच्च बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि देश के लिए उनका यह साहस, समर्पण और बलिदान समस्त देशवासियों को राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता रहेगा। राज्य सरकार इस दुख की घड़ी में शहीदों के परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है।

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