अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़
जागेश्वर धाम में बड़ा फैसला: भंडारे में नहीं चढ़ेंगे चाउमीन-मोमो, लगेगा सात्विक भोग
अल्मोड़ा के सुप्रसिद्ध जागेश्वर धाम में 16 जुलाई से शुरू हो रहे श्रावणी मेले के भंडारे में चाउमीन, मोमो और बर्गर जैसे फास्ट फूड पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
अल्मोड़ा। जिले में स्थित सुप्रसिद्ध जागेश्वर धाम से आस्था और परंपरा से जुड़ा एक बड़ा फैसला सामने आया है। आगामी 16 जुलाई से शुरू हो रहे ऐतिहासिक श्रावणी मेले को लेकर मंदिर समिति और पुजारियों ने कमर कस ली है। इस बार बाबा के दरबार में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध भंडारे के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। अब मंदिर परिसर में होने वाले भंडारों में श्रद्धालु चाउमीन, मोमो, पास्ता और चिली पोटेटो जैसे चाइनीज व फास्ट फूड उत्पाद नहीं चढ़ा सकेंगे।
जागेश्वर धाम में सावन के महीने में एक माह तक चलने वाले इस ऐतिहासिक मेले का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दौरान देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और मन्नत पूरी होने पर भंडारे का आयोजन करते हैं। पिछले कुछ सालों में देखा गया है कि विभिन्न राज्यों से आने वाले भक्त अपने स्थानीय व्यंजनों जैसे इडली, डोसा, बर्गर और पानी पूरी का भोग लगाने लगे थे। इस चलन पर अब मंदिर प्रशासन ने पूरी तरह से रोक लगाने का निर्णय लिया है।
इस नए नियम के तहत अब बाबा जागेश्वर को केवल पारंपरिक और सात्विक भोजन का ही भोग लगाया जाएगा। भंडारे में अब सिर्फ आलू, चना, पूरी, सूजी और हलवा जैसे शुद्ध पारंपरिक पकवान ही परोसे जा सकेंगे। व्यापार मंडल अध्यक्ष मुकेश भट्ट और मुख्य पुजारी महामंडलेश्वर कैलाशानंद जी महाराज ने इस फैसले का पुरजोर समर्थन किया है। उनका कहना है कि इस कदम से न केवल मंदिर की सनातन आस्था और मर्यादा बची रहेगी, बल्कि स्थानीय उत्पादों को भी बढ़ावा मिलेगा।
श्रावणी मेले में भंडारे के विशेष महत्व को देखते हुए मंदिर समिति ने एडवांस बुकिंग की व्यवस्था शुरू कर दी है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के उत्साह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बुकिंग शुरू होते ही कुछ ही दिनों में स्लॉट फुल होने की कगार पर पहुंच गए हैं। पुजारियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस सात्विक भोग के नियम को पूरी सख्ती के साथ लागू किया जाए ताकि जागेश्वर धाम की सदियों पुरानी धार्मिक पवित्रता अक्षुण्ण बनी रहे।
