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उत्तराखंड पुलिस

म्यांमार केके पार्क का खौफ: साइबर गुलामी से बचा उत्तराखंड का सौरव, सुनाई आपबीती

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म्यांमार के ‘केके पार्क’ में बंधक बने चमोली के सौरव परिहार ने सुनाई साइबर गुलामी की खौफनाक दास्तान। 18 घंटे काम और यातनाओं के बीच ऐसे बचाई जान। पूरी खबर पढ़ें।

देहरादून। उत्तराखंड के चमोली जिले का रहने वाला सौरव परिहार अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के सबसे खतरनाक ठिकाने ‘केके पार्क’ (KK Park Myanmar) से किसी तरह जान बचाकर वापस लौटा है। सौरव की आपबीती रोंगटे खड़े कर देने वाली है। उसे होटल की नौकरी के नाम पर पहले थाईलैंड भेजा गया और फिर अवैध रास्तों से म्यांमार की सीमा में धकेल दिया गया।
सौरव ने बताया कि उसे झांसा देने में देहरादून के स्थानीय एजेंट से लेकर दिल्ली और थाईलैंड के लोग शामिल थे। जब थाईलैंड में उसे काम नहीं मिला, तो नितिन रमोला नामक परिचित ने उसे केके पार्क में नौकरी लगवाने का लालच दिया। वहां पहुंचते ही सौरव और उसके दोस्त के पासपोर्ट छीन लिए गए और उन्हें बंधक बना लिया गया।
केके पार्क के भीतर का मंजर किसी जेल से कम नहीं था। सौरव के मुताबिक, वहां उनसे रोजाना 18-18 घंटे जबरन साइबर ठगी करवाई जाती थी। सोने के लिए केवल 4 घंटे मिलते थे और विरोध करने पर कठोर यातनाएं दी जाती थीं। म्यांमार सीमा पर नदी पार कराने के बाद उन्हें कथित तौर पर आर्मी के वाहनों में भरकर इस ठगी के अड्डे तक पहुंचाया गया था।
इस मामले में उत्तराखंड एसटीएफ (STF Uttarakhand) को शिकायत दी गई है। आईजी नीलेश आनंद भरणे ने कहा है कि स्थानीय एजेंटों की भूमिका की गंभीरता से जांच की जा रही है। उन्होंने युवाओं से अपील की है कि विदेश में नौकरी के नाम पर किसी भी अनजान एजेंट के झांसे में न आएं और पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही कदम उठाएं।

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