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दुनिया का कोई देव जन्म मृत्यु के बंधन से नहीं छूट सकता,जन्म कर्म के बंधन को मिटाने वाले सिर्फ तो सिर्फ शिव है: उमेश चंद्र शास्त्री

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हरिद्वार- सनातन ज्ञानपीठ सेक्टर 1 शिव मंदिर् भेल रानीपुर हरिद्वार द्वारा आयोजित शिव महापुराण की कथा के एकादश दिवस की कथा मे वृंदावन धाम से परम पूज्य उमेश चंद्र शास्त्री जी ने द्वादश ज्योतिर्लिंगों जा महिमा सुनाते हुए बताया कि दुनिया का कोई देव जन्म मृत्यु के बंधन से नहीं छूट सकता।जन्म कर्म के बंधन को मिटाने वाले सिर्फ तो सिर्फ शिव है नहीं तो हर व्यक्ति को कम का फल भोगना पड़ता है। राजा दशरथ को कर्म का फल भोगना पड़ा , माता सीता को कर्म का फल भोगना पड़ा। दुनिया में कोई ऐसा देव नहीं है, कोई ऐसा जीव नहीं है जिसको कर्म् का फल ना भोगना पड़े पर यह भी सत्य है कर्म् का फल उसी को भोगना पड़ता है जो शिव से दूर है महादेव की आराधना से कर्म् का फल भी नष्ट हो जाता है महादेव की कृपा से प्रारब्ध् को मिटाया जा सकता है कोई भी दुख उस व्यक्ति को छू नहीं सकता जो द्वादश ज्योतिर्लिंगो का स्मरण करता है। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का महत्व बताते हुए कहा जो व्यक्ति निष्काम भक्ति से पूजा करता है उसको कभी दोबारा गर्भ में आना नहीं पड़ता है और ज्योतिलिंग का भोग मुख में रखने से चान्द्रायण व्रत का फल प्राप्त होता है।
कथा व्यास जी ने बताया की ओर तो ओर जो व्यक्ति छ: मास किसी भी ज्योतिर्लिंग स्थान में वास करें उसका कभी भी भील योनी में जन्म नहीं होता उसका पवित्र कुल में जन्म होता है इतना ही नहीं जो ज्योतिर्लिंग में एक ओम नमः शिवाय की माला जपता है उसको करोड़ गुना फल मिलता है भगवान शिव की शरण में बिना भूत, भविष्य ,वर्तमान किसी भी काल् में किसी को भी सुख नहीं मिला, किसी भी दानव को, किसी भी देव् को,किसी भी मानव को दुख से मुक्त करने वाले एकमात्र देव सिर्फ और सिर्फ महादेव ही है।इस जगत में गुनहगार वो व्यक्ति है जो शिव का भजन नहीं करता। क्योंकि शिव है ऐसे देव है जो भाग्य को मिटाकर जो चाहे कर सकते जो। इस प्रकार द्वादश ज्योतिर्लिंगों की महिमा बड़े ही सुंदर ढंग से व्याख्या कर कथा को विराम दिया।
कथा में मंदिर सचिव ब्रिजेश शर्मा कथा के मुख्य यजमान राजीव ओर मीनाक्षी, जयप्रकाश, आदित्य गहलोत, राकेश मालवीय , रामकुमार, तेजप्रकाश, दिलीप गुप्ता, अनिल चौहान, सुनील चौहान, महेश, दीपक मोर, शशि शर्मा, ऋषि, संजीव, विष्णु समाधिया, मानदाता , होशियार , चंद्रभान, दिनेश उपाध्याय, मूला सिंह, डॉक्टर बाला कंबोज, धर्मपाल, रामाशीष,
अलका, संतोष, पुष्पा, कुसुम, सरला, अंजू, मंजू, डोली, विभा गौतम, भावना, अनपूर्णा, राजकिशोरी मिश्रा, रेनू शर्मा, अर्चना, कौशल्या, सुमन, विनोद देवी अनेको श्रोता उपस्थित रहे।

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