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देहरादून

ऋषिकेश में भारी तनाव: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वन विभाग की कार्रवाई, पुलिस से झड़प और ट्रेनें जाम

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ऋषिकेश में 2000 एकड़ वन भूमि से अतिक्रमण हटाने पर बवाल। पुलिस पर पथराव, रेलवे ट्रैक जाम होने से गंगानगर एक्सप्रेस रुकी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तनावपूर्ण हालात।

ऋषिकेश। उत्तराखंड के ऋषिकेश में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। वन विभाग द्वारा मकानों के पास खाली प्लॉटों के चिह्नीकरण का विरोध करते हुए स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस पर किए गए पथराव के बाद पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया। इस संघर्ष में कुछ लोगों के घायल होने की भी खबर है।
प्रदर्शनकारियों ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए मनसा देवी रेलवे फाटक के पास रेलवे ट्रैक को पूरी तरह जाम कर दिया है। इस कारण कोच्चिवली से आने वाली और योग नगरी स्टेशन से जाने वाली गंगानगर एक्सप्रेस करीब डेढ़ घंटे से खड़ी रही। रेलवे ट्रैक बाधित होने से यात्रियों को कड़ाके की ठंड में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मौके पर स्थिति को संभालने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
यह पूरी कार्रवाई ऋषिकेश क्षेत्र की 2000 एकड़ से अधिक वन भूमि को सुरक्षित करने के लिए की जा रही है। वन विभाग के अनुसार, यह भूमि सालों से अवैध अतिक्रमण की चपेट में है। वर्तमान में यह अभियान सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक विशेष समिति की निगरानी में चल रहा है। चीफ गढ़वाल धीरज पांडे के नेतृत्व में प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी रिकॉर्ड खंगालने और भूमि को कब्जे में लेने की प्रक्रिया में जुटे हैं।
विवाद की जड़ 75 साल पुरानी है, जब 1950 में ‘पशु लोक सेवा मंडल’ को 2866 एकड़ भूमि 99 साल की लीज पर दी गई थी। समय के साथ इस जमीन के बड़े हिस्सों पर अवैध कब्जे हो गए, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद प्रशासन अब लीज की शर्तों का उल्लंघन करने वाले भूखंडों को चिह्नित कर उन्हें वापस विभाग के नियंत्रण में ले रहा है।

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