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देहरादून

उत्तराखंड शिक्षक भर्ती 2026: 1670 पदों के लिए आज जिलों में काउंसलिंग, जानें नए नियम

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उत्तराखंड के सरकारी प्राइमरी स्कूलों में 1670 शिक्षकों की भर्ती के लिए आज सभी जिलों में एक साथ काउंसलिंग शुरू। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने प्रक्रियाओं में किए बड़े बदलाव।

देहरादून: उत्तराखंड के सरकारी प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। प्रदेश के 1670 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए आज, यानी सोमवार को सभी जिलों में एक साथ काउंसलिंग आयोजित की जा रही है। इस बार भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति लाने के लिए शिक्षा विभाग ने कई कड़े और नए प्रावधान लागू किए हैं।
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि इस बार सभी जिलों में एक ही तिथि पर काउंसलिंग कराई जा रही है। पिछले वर्षों में अलग-अलग तिथियों पर काउंसलिंग होने के कारण एक ही अभ्यर्थी कई जिलों में चयनित हो जाता था। बाद में पद छोड़ने के कारण सीटें खाली रह जाती थीं। अब एक अभ्यर्थी केवल एक ही जिले की काउंसलिंग में भाग ले सकेगा, जिससे वेटिंग लिस्ट की समस्या कम होगी और पद खाली नहीं रहेंगे।
इस भर्ती की प्रतिस्पर्धा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लगभग 6,000 युवाओं ने कुल 61,000 आवेदन किए हैं। अधिकांश अभ्यर्थियों ने कई जिलों से फॉर्म भरे थे, लेकिन मेरिट सूची जारी होने के बाद अब उन्हें अपनी प्राथमिकता वाले एक जिले को चुनना होगा। विभाग ने शनिवार देर शाम ही आधिकारिक वेबसाइट पर सभी जिलों की मेरिट सूची अपलोड कर दी थी।
काउंसलिंग के दौरान उत्तर प्रदेश से डीएलएड (D.El.Ed) करने वाले अभ्यर्थियों पर विशेष नजर रहेगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यूपी से डीएलएड करने वालों को काउंसलिंग के समय वही स्थायी निवास प्रमाण पत्र दिखाना होगा, जिसका उपयोग उन्होंने कोर्स के दौरान किया था। पिछली भर्तियों में निवास प्रमाण पत्र में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद यह कड़ा कदम उठाया गया है ताकि केवल पात्र उम्मीदवारों को ही मौका मिले।
एक ओर जहाँ भर्ती प्रक्रिया जारी है, वहीं दूसरी ओर ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020’ पर आयोजित वेबिनार में विशेषज्ञों ने तकनीकी कौशल पर जोर दिया। जीबी पंत संस्थान के निदेशक प्रो. वीके बंगा ने कहा कि युवाओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाकर ही 2047 तक ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। शिक्षा नीति का सफल क्रियान्वयन भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

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