देहरादून
उत्तराखंड में सेब उत्पादन के लिए बड़ा प्लान: हाई डेंसिटी बागवानी से बढ़ेगी किसानों की आय
मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने उत्तराखंड में सेब, कीवी और ड्रैगनफ्रूट उत्पादन बढ़ाने के लिए ‘अति सघन बागवानी योजना’ पर बैठक की। 2050 तक के लक्ष्य निर्धारित।
देहरादून: उत्तराखंड में सेब, कीवी और ड्रैगनफ्रूट के उत्पादन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। शुक्रवार को सचिवालय में मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में “अति सघन बागवानी योजना” (High-Density Plantation Scheme) को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में सेब की उत्पादन क्षमता को राष्ट्रीय स्तर के समकक्ष लाने के लिए मिशन मोड में कार्य किया जाए।
मुख्य सचिव ने बैठक में क्लस्टर बेस्ड एप्रोच (Cluster Based Approach) अपनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को छोटे-छोटे समूहों में संगठित कर नवीनतम प्रजातियों के बागान लगाने के लिए प्रेरित किया जाए। इस योजना का मुख्य उद्देश्य न केवल उत्पादन बढ़ाना है, बल्कि प्रदेश के बागवानों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करना है। प्रदेश में अभी सेब और कीवी जैसे फलों के लिए भूमि विस्तार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए मुख्य सचिव ने वर्ष 2030, 2040 और 2050 के लिए उत्पादन लक्ष्य (Production Targets) निर्धारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्तरकाशी के झाला (हर्षिल) में स्थित कोल्ड स्टोरेज की तर्ज पर राज्य के अन्य जनपदों में भी आधुनिक कोल्ड स्टोरेज नेटवर्क तैयार किया जाए। इससे किसान ऑफ-सीजन में अपने उत्पाद बेचकर बेहतर मुनाफा कमा सकेंगे और फसल की बर्बादी भी कम होगी।
सचिवालय में हुई इस चर्चा के दौरान पुरानी और कम उत्पादकता वाली किस्मों को बदलने पर भी सहमति बनी। मुख्य सचिव ने कहा कि पुराने बगीचों को अब ‘हाई डेंसिटी ऐपल प्लांट्स’ से रिप्लेस करने का समय आ गया है। इसके लिए स्थानीय नर्सरियों को अपग्रेड करने और किसानों को निरंतर तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए एक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) के गठन का सुझाव भी दिया गया है।
बैठक में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम और सचिव दिलीप जावलकर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि धरातल पर योजनाओं की सफलता के लिए नियमित मॉनिटरिंग अनिवार्य है। उत्तराखंड अब ‘देवभूमि’ के साथ-साथ ‘फलपट्टी’ के रूप में अपनी वैश्विक पहचान बनाने की दिशा में अग्रसर है, जिससे स्थानीय रोजगार में भी भारी वृद्धि होने की उम्मीद है।
