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हरिद्वार: शशि रंजन के गीतिका संग्रह ‘नवल विभा’ का विमोचन, सजी काव्य गोष्ठी

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धर्मनगरी हरिद्वार में शशि रंजन ‘समदर्शी’ की पुस्तक ‘नवल विभा’ का भव्य विमोचन। डॉ. शिव शंकर जायसवाल ने हरिद्वार को बताया उभरती ‘साहित्यिक नगरी’। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

हरिद्वार: धर्मनगरी हरिद्वार अब कला और संस्कृति के साथ-साथ तेजी से ‘साहित्यिक नगरी’ के रूप में अपनी पहचान बना रही है। यह विचार एस.एम.जे.एन. पीजी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. शिव शंकर जायसवाल ने व्यक्त किए। अवसर था प्रसिद्ध कवि और छंद व्याकरण के जानकार शशि रंजन ‘समदर्शी’ के गीतिका संग्रह ‘नवल विभा’ का भव्य विमोचन समारोह। ‘परिक्रमा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच’ द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम भेल के सरस्वती विद्या मंदिर के माधव सभागार में संपन्न हुआ।
समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. जायसवाल ने कहा कि साहित्य एक अनुभव का विषय है और एक साहित्यकार का अनुभव जितना व्यापक होगा, उसकी रचनाएं उतनी ही प्रभावी होंगी। कार्यक्रम के दौरान भेल के महाप्रबंधक डॉ. नागेंद्र प्रसाद राय और छंद विशेषज्ञ मनोज मानव ने भी अपने विचार साझा किए। विमोचित पुस्तक ‘नवल विभा’ की समीक्षा वरिष्ठ समीक्षक साधुराम पल्लव और डॉ. सुशील कुमार त्यागी द्वारा की गई। इस दौरान पुस्तक के रचयिता शशि रंजन ने अपनी गीतिकाओं का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
विमोचन के पश्चात आयोजित ‘सबरंग काव्य गोष्ठी’ में नगर के प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी ओजस्वी कविताओं से समां बांध दिया। वरिष्ठ गीतकार भूदत्त शर्मा ने ‘मां गंगा’ को नमन किया, वहीं अरुण कुमार पाठक ने होली पर हास्य रचना प्रस्तुत की। कंचन प्रभा गौतम की पंक्तियां “इंद्रधनुष के रंगों में रंगा है मेरा मन” और सुमन पंत की वसंत पर आधारित रचनाओं ने गोष्ठी में नवरस का संचार किया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी रचनाकारों ने गीतिका छंद की बारीकियों को भी समझा।
इस साहित्यिक महाकुंभ में हरिद्वार की विभिन्न संस्थाओं से जुड़े कवियों, जैसे ब्रजेन्द्र हर्ष, मदन सिंह यादव और देबाश्री चक्रबर्ती ने भी अपनी प्रस्तुतियां दीं। प्रकाशक विभा चौधरी ने अतिथियों को शाल और प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का समापन बेहद उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ, जहां वक्ताओं ने उम्मीद जताई कि ऐसे आयोजनों से हरिद्वार की साहित्यिक विरासत और समृद्ध होगी। अंततः, यह आयोजन न केवल एक पुस्तक विमोचन था, बल्कि साहित्य प्रेमियों के लिए एक विचारोत्तेजक संगम साबित हुआ।

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