देहरादून
रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी पंचतत्व में विलीन: CM धामी ने दी श्रद्धांजलि, दोषियों पर ‘प्रहार’ के निर्देश
देहरादून में सैन्य सम्मान के साथ रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी का अंतिम संस्कार। मुख्यमंत्री धामी ने परिजनों से मुलाकात कर ‘ऑपरेशन प्रहार’ शुरू करने के सख्त निर्देश दिए।
देहरादून। राजधानी देहरादून के सुंदरवाला क्षेत्र में गोलीबारी की घटना का शिकार हुए सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर मुकेश जोशी बुधवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। सैन्य सम्मान और नम आँखों के बीच उनके बेटे, जो भारतीय नौसेना में कमांडर हैं, ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दुखद घड़ी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दिवंगत सैन्य अधिकारी के आवास पहुंचे और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिजनों को ढांढस बंधाया और न्याय का भरोसा दिया।
मुख्यमंत्री धामी ने इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले तत्वों के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषियों के खिलाफ ऐसी कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी जो एक मिसाल बनेगी। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और परिवार को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।
इस घटना के बाद कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अधिकारियों को तत्काल पूरे प्रदेश में “ऑपरेशन प्रहार” चलाने के निर्देश दिए हैं। इस अभियान के तहत अवांछित तत्वों, हुड़दंगियों और अवैध हथियार रखने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। सीएम ने दो टूक कहा कि शांति भंग करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और पुलिस को खुली छूट दी गई है।
ब्रिगेडियर मुकेश जोशी के अंतिम संस्कार में राजनीति और सैन्य जगत की तमाम हस्तियां शामिल हुईं। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उनकी बेटी, जो गोवा में वरिष्ठ पत्रकार हैं, और उनके बेटे के देहरादून पहुंचने के बाद अंतिम यात्रा निकाली गई। पूरा माहौल गमगीन था और हर कोई इस जांबाज अधिकारी की असमय मृत्यु से स्तब्ध नजर आया।
प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करते हुए घटना की जांच तेज कर दी है। पुलिस की कई टीमें फरार आरोपियों और साक्ष्यों को जुटाने में लगी हैं। “ऑपरेशन प्रहार” के शुरू होने से उम्मीद जताई जा रही है कि देहरादून सहित पूरे उत्तराखंड में अपराध करने वालों के मन में कानून का भय पैदा होगा। सरकार का संकल्प है कि देवभूमि की शांति को किसी भी कीमत पर भंग नहीं होने दिया जाएगा।
