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उत्तराखण्ड

भगत सिंह कोश्यारी को मिलेगा पद्मभूषण सम्मान, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु करेंगी सम्मानित

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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को आज नई दिल्ली में ‘पद्मभूषण’ सम्मान से नवाजा जाएगा। जानिए ‘भगत दा’ के संघर्ष और राजनीतिक सफर की पूरी कहानी।

देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को आज यानी 25 मई को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्मभूषण’ से नवाजा जाएगा। नई दिल्ली में आयोजित एक गरिमामय समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उन्हें इस उच्च सम्मान से विभूषित करेंगी। उत्तराखंड में ‘भगत दा’ के नाम से लोकप्रिय कोश्यारी अपनी सादगी, अनुशासन और राष्ट्रवाद के लिए जाने जाते हैं। इस प्रतिष्ठित पुरस्कार की खबर मिलते ही पूरे राज्य के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
भगत सिंह कोश्यारी का जन्म 17 जून 1942 को बागेश्वर जिले के सुदूर गांव पलानधुरा में हुआ था। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय (अल्मोड़ा कॉलेज) से अंग्रेजी साहित्य में एमए की शिक्षा पूरी की। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बतौर लेक्चरर की थी, लेकिन जल्द ही वे पूरी तरह समाज सेवा में जुट गए। उन्होंने पिथौरागढ़ में सरस्वती शिशु मंदिर और विवेकानंद इंटर कॉलेज की स्थापना कर सीमांत क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगाई। इसके साथ ही उन्होंने समाज को जागरूक करने के लिए ‘पर्वत पीयूष’ नामक साप्ताहिक पत्रिका का संपादन भी किया।
आपातकाल के दौरान ‘मीसा’ कानून के तहत जेल जाने वाले कोश्यारी का राजनीतिक सफर बेहद शानदार रहा है। साल 2000 में उत्तराखंड राज्य बनने के बाद वे पहले मंत्रिमंडल में ऊर्जा मंत्री बने और बाद में उन्होंने मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली। वह संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्य रहे, जहाँ उन्होंने ‘वन रैंक वन पेंशन’ जैसे राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर अपनी अहम सिफारिशें दीं। साल 2019 में उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया, जहाँ उन्होंने कुशलतापूर्वक अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन किया।
राजनीति और समाज सेवा के साथ-साथ ‘भगत दा’ एक उत्कृष्ट लेखक और विचारक भी हैं। उन्होंने राज्य के विकास और ज्वलंत मुद्दों पर “उत्तरांचल प्रदेश क्यों” और “उत्तरांचल प्रदेशः संघर्ष एवं समाधान” जैसी महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं। उनका पूरा जीवन देश के युवाओं और समाजसेवियों के लिए प्रेरणा का एक बेहतरीन स्रोत है। इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान के मिलने से न केवल कोश्यारी का कद बढ़ा है, बल्कि यह पूरे उत्तराखंड राज्य के लिए भी एक अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण है।

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